
Kanimozhi on Delimitation: तमिलनाडु में परिसीमन को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने कहा कि उनकी पार्टी परिसीमन के खिलाफ नहीं है। डीएमके की मांग सिर्फ इतनी है कि परिसीमन निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए और इससे तमिलनाडु के अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए।
चेन्नई में पत्रकारों से बातचीत में कनिमोझी ने बताया कि मुख्यमंत्री की तरफ से परिसीमन को लेकर बुलाई गई बैठक में 32 सांसद शामिल नहीं हुए। उन्होंने कहा कि बैठक के नतीजे को लेकर भी अभी पूरी तस्वीर साफ नहीं है।
कनिमोझी ने कहा कि चुनाव जीतने से ज्यादा जरूरी तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा करना है। उनके मुताबिक, डीएमके अध्यक्ष और तत्कालीन मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चुनाव के दौरान भी साफ कहा था कि राज्य के हितों की रक्षा राजनीतिक जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण है। कनिमोझी ने कहा कि पार्टी का उद्देश्य तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा करना है। उनका कहना था कि परिसीमन ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे राज्य को नुकसान हो।
कनिमोझी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की ओर से बुलाई गई सांसदों की बैठक का उद्देश्य मेकेदातु बांध के मुद्दे से ध्यान भटकाना भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि बैठक में 32 सांसद शामिल नहीं हुए। कनिमोझी ने यह भी आरोप लगाया कि तमिलनाडु सरकार के मुख्य सचिव सांसदों को बैठक में शामिल होने के लिए सीधे फोन कर रहे थे और पत्र भेज रहे थे। विपक्ष ने इसे लेकर सवाल उठाए हैं।
एमडीएमके के प्रधान सचिव और सांसद दुरई वाइको ने भी परिसीमन को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर परिसीमन संशोधन विधेयक पास होता है तो तमिलनाडु समेत दक्षिणी राज्यों के हित प्रभावित हो सकते हैं। वाइको ने कहा कि आबादी के आधार पर होने वाले परिसीमन का असर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के पास 39 लोकसभा सांसद हैं फिर भी वित्तीय हिस्सेदारी के मामले में राज्य को उसका उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है।
उन्होंने केंद्र के सीटों में 50 फीसदी बढ़ोतरी के प्रस्ताव को भी बीजेपी सरकार की चाल बताया। वाइको ने परिसीमन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या आयोग तमिलनाडु के हितों को ध्यान में रखकर काम करेगा।
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और सांसद मणिकम टैगोर ने डीएमके और एआईएडीएमके के बैठक के बहिष्कार को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री ने पहली बार सभी दलों के सांसदों के साथ परिसीमन के मुद्दे पर बैठक बुलाई थी। टैगोर ने बताया कि बैठक में लोकसभा की 543 सीटों की मौजूदा संख्या बनाए रखने की बात सामने आई। तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों में भी कोई कमी नहीं होनी चाहिए। उनका कहना था कि मौजूदा स्थिति बरकरार रहनी चाहिए और महिला आरक्षण लागू किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु पहले भी परिसीमन योजना का विरोध कर चुका है। अब राज्य को आशंका है कि केंद्र बदले हुए प्रस्ताव के साथ परिसीमन को आगे बढ़ा सकता है।