
कलबुर्गी। कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर निकले कर्नाटक के श्रद्धालुओं ने नेपाल में ऐसी भयावह आपदा का सामना किया, जिसे वे जिंदगीभर नहीं भूल पाएंगे। कलबुर्गी निवासी 50 वर्षीय मल्लिनाथ कोलकुंडी ने नेपाल में आई फ्लैश फ्लड का खौफनाक मंजर बयां किया है। उन्होंने बताया कि उनकी बस के आगे चल रही दो बसें देखते ही देखते बाढ़ के तेज बहाव में बह गईं। अचानक आए पानी और मलबे के सैलाब से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि बस चालक ने समय रहते सूझबूझ दिखाई और बस को ऊंचाई वाले स्थान पर पहुंचा दिया, जिससे बस में सवार सभी 28 यात्रियों की जान बच गई।
मल्लिनाथ के अनुसार वे 21 अगस्त को हैदराबाद से कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए रवाना हुए थे। काठमांडू पहुंचने के बाद बस से मानसरोवर की ओर जाते समय करीब तीन घंटे बाद बट्टार इलाके के पास अचानक मौसम और हालात बदल गए। पास में त्रिशूली नदी बह रही थी और एक पुल भी था। इसी दौरान अचानक विस्फोट जैसी तेज आवाज सुनाई दी। यात्रियों को कुछ समझ में आता, उससे पहले ही पानी का तेज बहाव सड़क की ओर आने लगा। देखते ही देखते सड़क पर पानी और मलबा भर गया। आगे चल रही दो बसें फ्लैश फ्लड की चपेट में आ गईं और यात्रियों की आंखों के सामने बह गईं।
बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ता देख बस चालक ने बिना समय गंवाए बस को ऊंचाई वाले स्थान की ओर मोड़ दिया। चालक की इस त्वरित कार्रवाई से बस में सवार सभी 28 यात्रियों की जान बच गई। मल्लिनाथ ने बताया कि उस समय यात्रियों में डर का माहौल था। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि कुछ ही क्षणों में क्या हो गया। बस में मल्लिनाथ समेत कर्नाटक के दो यात्री सवार थे। सभी सुरक्षित हैं। मल्लिनाथ और उनका समूह बाद में सुरक्षित काठमांडू लौट आया।
मल्लिनाथ ने बताया कि उनके संपर्क में रहने वाले छह अन्य लोग तिब्बत के सागा क्षेत्र में फंसे हुए थे। उनकी स्थिति को लेकर भी यात्री लगातार जानकारी लेते रहे। यात्रा एजेंसी की व्यवस्था के अनुसार, मल्लिनाथ और उनके समूह के दिल्ली पहुंचने की योजना है।