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टेरर फंडिंग केस: अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को राहत, सुप्रीम कोर्ट से 6 साल बाद मिली जमानत

Supreme Court: कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को सुप्रीम कोर्ट ने 6 साल की जेल के बाद कुछ शर्तों के साथ जमानत दी। इस मामले में NIA की जांच और अलगाववादी आंदोलन को बढ़ावा देने के आरोप शामिल हैं।
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Mar 12, 2026
Supreme Court
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Terror Funding Case: टेरर फंडिंग मामले में कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने कुछ शर्तों के साथ उन्हें जमानत दे दी है। शब्बीर शाह 2019 से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की गिरफ्त में थे। शब्बीर अहमद शाह के वकील कॉलिन गोंसाल्वेस और एनआईए की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एनआईए से विशेष रूप से 1990 के दशक की पुरानी स्पीच पर आधारित सबूतों के बारे में कई सवाल किए। अदालत ने पूछा कि इतने पुराने बयानों पर अब किस तरह भरोसा किया जा सकता है और छह साल से अधिक हिरासत का क्या ठोस आधार है।

इससे पहले शब्बीर शाह की जमानत याचिका दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी। इस फैसले के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। याचिका में शब्बीर शाह की ओर से कहा गया कि उनकी उम्र अब 74 वर्ष हो चुकी है और वे इस मामले में छह साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं। मामले के ट्रायल में कुल 400 गवाह हैं, जिनमें से अब तक केवल 15 की गवाही पूरी हो सकी है।

अलगाववादी आंदोलन खड़ा करने का आरोप

शब्बीर अहमद शाह को जून 2019 में गिरफ्तार किया गया था। एनआईए ने 4 अक्टूबर 2019 को दाखिल दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में उन्हें आरोपी बनाया था।

उन पर आरोप है कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी आंदोलन को बढ़ावा देने, मारे गए आतंकियों को श्रद्धांजलि देने, हवाला लेनदेन के जरिए पैसे लेने और एलओसी ट्रेड के माध्यम से फंड जुटाने में भूमिका निभाई। आरोप है कि इन गतिविधियों से विध्वंसक और आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा मिला।

Updated on:
12 Mar 2026 02:18 pm
Published on:
12 Mar 2026 02:03 pm
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