बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी और जदयू के संस्थापक सदस्य केसी त्यागी ने 17 मार्च को जदयू से इस्तीफा दिया। रविवार को वे केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी की पार्टी राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) में शामिल हो गए। त्यागी ने चौधरी चरण सिंह की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी और जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व नेता केसी त्यागी अब केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी की पार्टी राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) में शामिल हो गए हैं।
त्यागी जदयू के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। उन्होंने 17 मार्च को ही जदयू से इस्तीफा दे दिया था। रालोद में रविवार को शामिल होने के बाद उन्होंने चौधरी चरण सिंह की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
सियासी गलियारों में अब तक यह सबसे बड़ा सवाल था कि जिस जदयू पार्टी को त्यागी ने खुद नीतीश के साथ मिलकर बनाई थी, उसे अचानक उन्होंने क्यों छोड़ दिया? तो इसका जवाब भी मिल गया है।
त्यागी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनका यह कदम बदलाव के बजाय निरंतरता को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर खुलकर जोर दिया कि जदयू और आरएलडी के बीच कोई अंतर नहीं है।
त्यागी ने नीतीश कुमार और चौधरी अजित सिंह द्वारा राजनीतिक रूप से एकजुट होने के पिछले प्रयासों को याद किया। त्यागी ने कहा- मैंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत लोक दल से ही की थी।
उन्होंने कहा- यह पार्टी बस इसका मूल रूप है। इसमें कुछ भी नया नहीं है। हम चौधरी चरण सिंह के अधूरे सपनों को पूरा करने में मदद करेंगे। जदयू और रालोद के बीच कोई अंतर नहीं है।
त्यागी ने आगे कहा- एक समय था जब नीतीश कुमार और चौधरी अजित सिंह मिलकर एक पार्टी बनाने वाले थे। इन दोनों के बीच कोई अंतर नहीं है। बता दें कि त्यागी दिल्ली में RLD अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी की मौजूदगी में औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल हुए।
इससे पहले त्यागी ने बुधवार को कहा था कि उन्होंने पार्टी के हालिया सदस्यता अभियान में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यसभा सीट के बंटवारे को लेकर उनके और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच कोई निजी मनमुटाव नहीं है।
पार्टी की स्थापना के समय से ही इसके संस्थापक सदस्य रहे त्यागी ने कहा कि नीतीश कुमार और बिहार जदयू के साथ उनके संबंध पहले जैसे ही हैं।
उन्होंने कहा- मैं जॉर्ज फर्नांडिस, शरद यादव, नीतीश कुमार और दिग्विजय सिंह के साथ जनता दल (यूनाइटेड) का संस्थापक सदस्य हूं। मैं तब से ही पार्टी का सदस्य रहा हूं।
वरिष्ठ नेता ने अपनी संसदीय महत्वाकांक्षाओं को लेकर चल रही अटकलों पर भी बात की। उन्होंने इस बात से इनकार किया कि उनका पार्टी छोड़ना राज्यसभा सीट पाने की इच्छा से जुड़ा था।
त्यागी ने कहा- ऐसा एक भी मौका नहीं आया जब मैंने राज्यसभा का टिकट पाने की कोशिश की हो। यहां तक कि 2013 में भी, नीतीश कुमार ने मुझे खुद फोन करके टिकट की पेशकश की थी।