
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह(फोटो-IANS)
Op Sindoor: रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह जवानों के सर्वोच्च बलिदान को लेकर हाल में प्रसारित कुछ मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्टें तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। मंत्रालय ने कहा कि इन जवानों को पहली बार अब सार्वजनिक सम्मान दिए जाने का दावा सही नहीं है, क्योंकि राष्ट्र ने उनके बलिदान को पहले ही उचित समय पर सम्मानित किया था।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए छह जवानों के बलिदान को हाल ही में पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया गया। मंत्रालय ने इसे खारिज करते हुए कहा कि इन वीर जवानों को संबंधित रिपोर्टों से काफी पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर श्रद्धांजलि दी जा चुकी थी।
मंत्रालय के अनुसार, 11 मई 2025 को आयोजित आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए इन जवानों को श्रद्धांजलि दी थी और उनके बलिदान का विशेष रूप से उल्लेख किया था। इसके बाद 14 अगस्त 2025 की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में इन छह वीर सैनिकों को वीरता पुरस्कार दिए जाने की जानकारी सार्वजनिक की गई थी। मंत्रालय ने कहा कि यह उनके साहस और सर्वोच्च बलिदान की औपचारिक राष्ट्रीय मान्यता थी। साथ ही भारतीय सेना के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी तत्काल श्रद्धांजलि संदेश शेयर किए गए थे।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि शहीद जवानों के सम्मान का सिलसिला लगातार जारी रहा। 15 जनवरी 2026 को जयपुर में आयोजित सेना दिवस परेड के दौरान थल सेना प्रमुख ने तीन शहीद सैनिकों के परिजनों को सेना मेडल (गैलेंट्री) प्रदान किया। वहीं 8 अक्टूबर 2025 को वायु सेना प्रमुख ने भी एक औपचारिक समारोह में वीरता पदक परिजनों को सौंपे थे।
रक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों के नाम अंकित किए जाने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। मंत्रालय ने कहा कि यह प्रक्रिया तय प्रोटोकॉल के तहत पूरी सावधानी, सम्मान और औपचारिकता के साथ पूरी की जाती है। इसलिए यह कहना कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, तथ्यात्मक रूप से गलत है।
मंत्रालय ने कहा कि इस मुद्दे पर अनावश्यक विवाद खड़ा किया गया है। ऐसी भ्रामक बातें न केवल तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करती हैं, बल्कि शहीदों के परिजनों की भावनाओं को भी आहत कर सकती हैं और सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के सम्मान को प्रभावित करती हैं। मंत्रालय ने सभी पक्षों से अपील की कि शहीद सैनिकों से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करते समय जिम्मेदारी और संयम बरतें तथा अपुष्ट जानकारी प्रसारित करने से बचें।
Updated on:
28 Jun 2026, 4:40 AM IST
Published on:
28 Jun 2026, 4:40 AM IST
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