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केरल चुनाव से पहले अंदरुनी दरार के चलते यह बड़े नेता छोड़ सकते है कांग्रेस का साथ

केरल के वरिष्ठ कांग्रेस नेता के. सुधाकरन ने टिकट विवाद के बाद पार्टी से अलग होने का संकेत दिया है। वे स्वतंत्र चुनाव लड़ सकते हैं या नई पार्टी बना सकते हैं, जिससे राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव संभव है।

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Mar 19, 2026
कांग्रेस नेता के. सुधाकरन (फोटो- एएनआई)

केरल की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से सक्रिय कांग्रेस नेता के. सुधाकरन राज्य की राजनीति में एक मजबूत चेहरा रहे हैं। अब खबर है कि उन्होंने कांग्रेस से अलग होने का फैसला कर लिया है, जिससे राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, के. सुधाकरन ने पार्टी हाईकमान से विधानसभा टिकट को लेकर कई बार संपर्क किया, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसी कारण उन्होंने अलग रास्ता अपनाने का संकेत दिया है और जल्द ही अपने अगले कदम की घोषणा कर सकते हैं।

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केरल कांग्रेस में लंबे समय से नेतृत्व को लेकर विवाद

केरल में कांग्रेस के भीतर लंबे समय से नेतृत्व को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं। सुधाकरन पहले केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। इसके बावजूद टिकट को लेकर अनिश्चितता ने उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ा दी। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने करीबी नेताओं और समर्थकों से चर्चा कर भविष्य की रणनीति तैयार की है। इस घटनाक्रम को कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी पहले से ही राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में लड़ सकते है चुनाव

सुधाकरन के करीबी सूत्रों का कहना है कि वे कन्नूर विधानसभा क्षेत्र से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं। इसके अलावा, यह भी संभावना जताई जा रही है कि वे एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने का विकल्प चुन सकते हैं। उन्होंने कथित तौर पर अपने कई वरिष्ठ सहयोगियों को फोन कर स्थिति से अवगत कराया और विदाई का संकेत भी दिया। यह कदम उनके कांग्रेस से अलग होने के फैसले को और मजबूत करता है।

राज्य की राजनीति में आ सकता है बड़ा बदलाव

सुधाकरन का कांग्रेस से अलग होना राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। वे कन्नूर क्षेत्र में प्रभावशाली नेता माने जाते हैं और उनकी लोकप्रियता चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटनाक्रम से कांग्रेस को नुकसान हो सकता है, जबकि अन्य पार्टियां इसका फायदा उठाने की कोशिश करेंगी। खासकर वाम दलों और क्षेत्रीय दलों के लिए यह अवसर बन सकता है।

Updated on:
19 Mar 2026 12:55 pm
Published on:
19 Mar 2026 12:51 pm
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