
कांग्रेस में केरल का नया मुख्यमंत्री घोषित होते ही जश्न का माहौल शुरू हो गया है, लेकिन वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला के घर पर उदासी नजर आई है। 70 साल की उम्र में भी क्लिफ हाउस पहुंचने की जो उम्मीद उन्होंने संजो रखी थी, वो आज टूट गई।
दिल्ली से राहुल गांधी का फोन आया और केरल का पूरा सियासी पिक्चर बदल गया। चेन्निथला लंबे समय से पार्टी के संगठनात्मक कामों में लगे रहे। उन्होंने बहुत कम उम्र में मंत्री पद संभाला था।
करुणाकरन के मंत्रिमंडल में 27 साल की उम्र में मंत्री बनकर उन्होंने साबित कर दिया था कि वो संगठन के सच्चे सिपाही हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि उन्हें लगता था कि उनकी सीनियरिटी और अनुभव आखिरकार काम आएगा। आज सुबह तक उनके कैंप में उम्मीद बरकरार थी।
रमेश के पास करीब 10 बजे राहुल गांधी का फोन आया। सूत्रों के मुताबिक, फोन रखते ही वह अपने बेडरूम में चले गए। करीब आधा घंटा तक वो अंदर ही रहे। बाहर उनके करीबी विधायक और सहयोगी इंतजार करते रहे।
जब वो बाहर निकले तो चेहरे पर साफ था कि हाई कमांड ने वीडी सतीशन का नाम तय कर लिया है। इसके बाद चेन्निथला ने मीडिया से बचने का रास्ता अपनाया। उनके तीन सबसे करीबी नए विधायक उनके साथ थोड़ी देर रहे।
फिर चेन्निथला घर के पिछले दरवाजे से निकलकर चले गए। बाहर टीवी कैमरे और रिपोर्टर इंतजार कर रहे थे, लेकिन उनके सहयोगियों ने सिर्फ इतना कहा- चेन्निथला घर पर नहीं हैं।
बाद में पता चला कि चेन्निथला अपने गृह जिले अलप्पुझा के हरिपाद की ओर रवाना हो चुके हैं। वहां से वो कल सुबह गुरुवायुर मंदिर पहुंचकर दर्शन करने वाले हैं।
पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि वो आज होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक में भी शायद शामिल न हों, जहां सतीशन को औपचारिक रूप से नेता चुना जाएगा।
चेन्निथला का राजनीतिक सफर लंबा और संघर्ष भरा रहा है। उन्होंने हमेशा पार्टी की एकता और अनुशासन को प्राथमिकता दी। अब सवाल ये है कि आने वाले दिनों में चेन्निथला किस भूमिका में नजर आएंगे। क्या वो पूरी तरह से अलग हो जाएंगे या पार्टी को मजबूत करने में लगे रहेंगे?
फिलहाल उनका चुप रहना और मंदिर जाना इस बात का संकेत है कि वो इस फैसले को आत्मसात करने की कोशिश कर रहे हैं। केरल की सियासत में यह फैसला न सिर्फ कांग्रेस के अंदर बल्कि पूरे राज्य की राजनीति पर असर डालेगा।