
Mohan Bhagwat Latest News: राष्ट्रीयस्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। शनिवार को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आज की नई पीढ़ी हर बात पर सवाल करती है। ऐसे में उन्हें आदेश देने के बजाय संवाद के जरिए समझाना ज्यादा जरूरी है। उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब देश में पेपर लीक के मुद्दे पर छात्र आंदोलन कर रहे हैं और राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है। बयान के बाद मोहन भागवत सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगे। आपको बताते हैं उनके 5 ऐसे बयान, जो काफी चर्चा में रहे थे।
दिल्ली में अपने संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि पहले के समय में बच्चे माता-पिता की बात बिना सवाल किए मान लेते थे, लेकिन आज की पीढ़ी हर बात के पीछे कारण जानना चाहती है। उन्होंने कहा कि युवाओं को सिर्फ आदेश देकर नहीं, बल्कि बातचीत और तर्क के साथ सही दिशा दिखाई जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि शक्ति के बल पर किसी पर अपनी इच्छा नहीं थोपी जा सकती।
दिसंबर 2012 में मेरठ में आयोजित RSS के एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा था कि चीन भारत के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। उनका कहना था कि भारत के चारों ओर चीन जिस तरह अपना प्रभाव बढ़ा रहा है, उससे सुरक्षा संबंधी खतरे बढ़ रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान और बांग्लादेश का भी उल्लेख करते हुए कहा था कि भारत को अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है।
जनवरी 2013 में इंदौर में दिए गए एक बयान में मोहन भागवत ने विवाह को सामाजिक समझौता (सोशल कॉन्ट्रैक्ट) बताया था। उन्होंने कहा था कि पति-पत्नी के रिश्ते में दोनों की जिम्मेदारियां तय होती हैं। जब तक दोनों अपने-अपने दायित्व निभाते हैं, तब तक वैवाहिक संबंध सुचारु रूप से चलता है। इस बयान पर उस समय व्यापक बहस हुई थी।
3.'भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू' वाला बयान
अगस्त 2014 में ओडिशा के एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा था कि जिस प्रकार इंग्लैंड में रहने वाले अंग्रेज और अमेरिका में रहने वाले अमेरिकी कहलाते हैं, उसी तरह भारत में रहने वाले सभी लोगों की सांस्कृतिक पहचान हिंदू है। उन्होंने हिंदुत्व को जीवन शैली बताते हुए कहा था कि किसी भी धर्म को मानने वाला या किसी धर्म का पालन न करने वाला व्यक्ति भी इस सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हो सकता है।
सितंबर 2015 में RSS के मुखपत्रों पाञ्चजन्य और ऑर्गेनाइजर को दिए इंटरव्यू में मोहन भागवत ने आरक्षण व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा करने की बात कही थी। उन्होंने सुझाव दिया था कि एक निष्पक्ष समिति यह तय करे कि किन वर्गों को कितने समय तक आरक्षण की आवश्यकता है। इस बयान के बाद देशभर में राजनीतिक बहस छिड़ गई थी और विपक्षी दलों ने इसकी आलोचना की थी।
14 अगस्त 2022 को नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने कहा था कि भारत अहिंसा में विश्वास रखता है, लेकिन इसका अर्थ कमजोरी नहीं है। उन्होंने कहा था कि देश को मजबूत बनाने के लिए भयमुक्त समाज जरूरी है। साथ ही उन्होंने जातीय विभाजन से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और देशहित में कार्य करने का आह्वान किया।