
आज पश्चिन बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों का दिन है। आज शाम तक यह साफ हो जायेगा कि बंगाल में सीएम ममता बनर्जी की वापसी होगी या बीजेपी सरकार बनाएगी।
कोलकाता और उत्तर 24 परगना के सभी इलाकों में एक ही सवाल घूम रहा है- इस बार क्या होगा? 294 सीटों वाले बंगाल विधानसभा चुनाव में इन दो जिलों की 44 सीटें (कोलकाता की 11 और उत्तर 24 परगना की 33) किसी भी पार्टी के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती हैं।
उत्तर 24 परगना हमेशा से बंगाल की राजनीति का दिल रहा है। यहां मतुआ समुदाय की आबादी, सीमा क्षेत्र की संवेदनशीलता और कोलकाता के नजदीकी इलाकों की शहरी आकांक्षाएं मिलकर एक अनोखा चुनावी मिश्रण बनाती हैं।
इस बार तृणमूल कांग्रेस ने यहां कई पुराने चेहरों को टिकट नहीं दिया। संदेशखाली, बशीरहाट, हरुआ जैसे इलाकों में नए चेहरे उतारे गए।
पार्टी का दावा है कि नए लोग स्थानीय मुद्दों को बेहतर तरीके से उठा पाएंगे। हालांकि, RG Kar कांड के बाद पूरे राज्य में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा बहुत गर्म है।
उत्तर 24 परगना जिले की बात करें तो यहां इस बार सबसे हॉट सीटों में पानिहाटी का नाम सबसे ऊपर है। भाजपा ने यहां RG Kar रेप पीड़िता की मां को टिकट दिया है। उनकी लड़ाई सिर्फ सीट की नहीं, बेटी के न्याय और पूरे राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर है।
उनका मुकाबला टीएमसी के तीर्थंकर घोष और सीपीआई (एम) के उम्मीदवार से है। उधर, बिधाननगर और राजारहाट न्यू टाउन भी हॉट सीट बने हुए हैं। यहां शहरी युवा, आईटी प्रोफेशनल्स और मध्यम वर्ग के वोटर तय करेंगे कि विकास का एजेंडा चलेगा या स्थानीय मुद्दे हावी होंगे।
उत्तर 24 परगना जिले के बरासत और दमदम सीट पर भी कड़ी टक्कर है। मतुआ बहुल इलाकों में भाजपा अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी रही। वहीं, कोलकाता की बात करें तो भवानीपुर हमेशा की तरह सबसे ज्यादा चर्चा में है।
यहां से सीएम ममता बनर्जी खुद मैदान में हैं,उनका सामना बीजेपी के मजबूत चेहरे से है। वहीं कोलकाता पोर्ट पर फिरहाद हाकिम जैसे दिग्गज नेता टीएमसी की ओर से मोर्चा संभाले हुए हैं, लेकिन बीजेपी यहां भी मजबूत उम्मीदवार उतार चुकी है।
बालिगंज, रसबीहारी और जोरासांको जैसी पारंपरिक सीटों पर तृणमूल की पकड़ मजबूत दिखती है, फिर भी बीजेपी ने शहरी बेरोजगारी और रोजमर्रा की समस्याओं को लेकर जोरदार प्रचार किया है।
उत्तर 24 परगना के बरासत, दमदम, खड़दह, पानिहाटी जैसे इलाकों में पिछले चुनाव में भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया था। इस बार वोटर लिस्ट से नाम कटने का मुद्दा भी गरमा गया है।
टीएमसी इसे BJP की साजिश बता रही है तो भाजपा कह रही है कि ये फर्जी वोट रोकने की कोशिश है। स्थानीय नेता और कार्यकर्ता दोनों तरफ से बताते हैं कि इस बार मुकाबला पिछले चुनाव से कहीं ज्यादा कड़ा है।