
Environmental Conservation: लद्दाख की खूबसूरत वादियां और शांत झीलें हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर खींचती हैं। लेकिन कुछ लोगों की लापरवाही यहां की नाजुक प्रकृति और वन्यजीवों के लिए खतरा बन रही है। अब ऐसे लोगों पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। जी हां, पहली बार चार पर्यटकों पर ‘वन्यजीव संरक्षण नियम’ तोड़ने के आरोप में 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यानी कुल 2 लाख रुपये की पेनाल्टी वसूली गई है। चारों वाहनों को भी जब्त कर लिया गया। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि भविष्य में ऐसे मामलों में और भी कड़ी कार्रवाई होगी।
लद्दाख प्रशासन के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में ‘पैंगोंग झील’, ‘चांगथांग कोल्ड डेजर्ट वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी’ और ‘नुब्रा घाटी’ के संरक्षित इलाकों में कई पर्यटक नियमों का उल्लंघन करते मिले। जैसे गाड़ी को गलत तरीके से चलना। उससे वन्यजीव का पीछा करना। उन्हें बेवजह दौड़ना, उनका पीछा करना शामिल है। वन्यजीव विभाग की पेट्रोलिंग और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की मदद से चार मामलों की पहचान की गई।
23 जून को महिंद्रा थार PB 11DD 7773 को मेराक के पास पैंगोंग झील के पानी में ऑफ-रोडिंग करते हुए पकड़ा गया। चालक स्टंट करने के लिए गाड़ी को झील के अंदर ले गया, जिससे पर्यावरण और वन्यजीवों के आवास को नुकसान पहुंचा।
21 जून को हुंडई क्रेटा UP 81DD 4592 लुकुंग के पास पैंगोंग झील के किनारे ऑफ-रोड ड्राइविंग करती मिली। बाद में इस वाहन को चांगला दर्रे के जिंगराल इलाके में रोककर जब्त कर लिया गया।
20 जून को महिंद्रा थार PB 65BL 8698 को काराकोरम 'नुब्रा-श्योक' वन्यजीव अभयारण्य के भीतर एक धारा में चलाते हुए देखा गया। इससे संरक्षित क्षेत्र की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचा।
17 जून को सबसे गंभीर मामला सामने आया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में टोयोटा फॉर्च्यूनर HP 37H 7888 'चांगथांग कोल्ड डेजर्ट वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी' में नूरबू ला के पास एक दुर्लभ 'तिब्बती गजेल हिरण' का पीछा करती दिखाई दी। वन्यजीव विभाग और पुलिस ने रातभर तलाश अभियान चलाया। अगले दिन हानले के एक होमस्टे के बाहर वाहन को पकड़ लिया गया। और उन पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। बता दें पकड़े गए वाहन हिमाचल प्रदेश, पंजाब, चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश से आए पर्यटकों के थे।
लद्दाख प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों, झीलों, नदी-नालों और घास के मैदानों में ऑफ-रोड ड्राइविंग या स्टंट न करें। ऐसे कृत्य न केवल वन्यजीवों को परेशान करते हैं, बल्कि नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र यानी की इन्वायरमेंट को भी नुकसान पहुंचाते हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत भविष्य में भी ऐसे नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।