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Lok Sabha Delimitation: बिगड़ सकता है भारत का संघीय ढांचा, कांग्रेस नेता मनीष तिवारी और जयराम बोले- छोटे राज्यों का वजूद खतरे में

लोकसभा सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव पर सियासी जंग तेज। कांग्रेस ने कहा सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे हथियार अपना रही है, जिससे राज्यों का शक्ति संतुलन बिगड़ सकता है।

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Apr 06, 2026
जयराम रमेश ने मोदी सरकार को घेरा (Photo-IANS)

Lok Sabha Delimitation: देश में महिला आरक्षण कानून लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष केंद्र सरकार के इस कदम को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि यह प्रस्ताव बड़े और अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को फायदा पहुंचाएगा, जिससे संघीय संतुलन बिगड़ सकता है और छोटे राज्यों का प्रभाव घट सकता है।

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'बड़े राज्यों का दबदबा, छोटे राज्यों का वजूद खतरे में'

कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री यह दावा कर रहे हैं कि लोकसभा सीटों में 50% बढ़ोतरी से दक्षिण भारतीय राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन यह वास्तविकता से अलग है। रमेश ने उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश और केरल के बीच सीटों का अंतर अभी 60 है, जो प्रस्ताव लागू होने पर बढ़कर 90 हो सकता है। इसी तरह उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के बीच अंतर 41 से बढ़कर 61 तक पहुंच सकता है।

संघीय ढांचे पर असर, अन्य राज्यों की चिंता

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह मुद्दा केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर पूर्व के राज्यों पर भी इसका असर पड़ेगा। उनके अनुसार, इन राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी कम हो सकती है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि यह प्रस्ताव हिंदी भाषी राज्यों के पक्ष में संतुलन को झुका सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर पश्चिम के राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और दिल्ली के पास अभी कुल 40 सीटें हैं, जबकि अकेले उत्तर प्रदेश के पास 80 सीटें हैं, और यह अंतर आगे और बढ़ सकता है।

हिंदी भाषी राज्यों का झुकाव, बिगड़ेगा संघीय संतुलन?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने संसद सत्र की तारीखों पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद सत्र बुलाने का फैसला संदिग्ध है, क्योंकि इस दौरान तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव होने हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इस समय महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन विधेयक लाकर विपक्षी सांसदों को भाग लेने से रोका जा सकता है। चिदंबरम ने लोकसभा की संख्या 816 तक बढ़ाने के प्रस्ताव को अव्यवहारिक बताते हुए कहा कि इससे सदन बहुत बड़ा और असंतुलित हो जाएगा, जहां सांसदों को बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलेगा।

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Published on:
06 Apr 2026 10:00 am
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