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CBSE के नए चेयरमैन की घोषणा, लोखंडे प्रशांत सीताराम बने सीएबीएसई के नए चेयरमैन

CBSE में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने लोखंडे प्रशांत सीताराम को बोर्ड का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। इससे कुछ ही घंटे पहले चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया था ।

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Jun 02, 2026
New CBSE Chairman Announced
CBSE

CBSE New Chairman: केंद्र सरकार ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब बोर्ड की नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। सरकार ने लोखंडे प्रशांत सीताराम को CBSE का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। अब वही बोर्ड की जिम्मेदारी संभालेंगे।

कौन हैं लोखंडे प्रशांत सीताराम?


लोखंडे प्रशांत सीताराम अभी गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर काम कर रहे हैं। आपको बता दें कि ये लोखंडे प्रशांत सीताराम ने बीई मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। लोखंडे प्रशांत महाराष्ट्र के रहने वाले और IAS हैं।

ऑन-स्क्रीन मार्किंग से बढ़ा था विवाद


दरअसल, इस साल कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू किया गया था। इस व्यवस्था के तहत छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल तरीके से जांचा गया। शुरुआत में इसे पारदर्शिता और तेजी बढ़ाने वाला कदम बताया गया था, लेकिन बाद में कई छात्रों और अभिभावकों ने इसकी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। कुछ छात्रों का दावा था कि बोर्ड की वेबसाइट पर जो स्कैन कॉपियां अपलोड की गईं, उनकी लिखावट उनकी असली हैंडराइटिंग से मेल नहीं खा रही थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे ने तेजी पकड़ ली। छात्रों और अभिभावकों ने आशंका जताई कि कहीं उत्तर पुस्तिकाओं के मिलान में गड़बड़ी तो नहीं हुई।

केवल कॉपियों के मिलान का मामला ही नहीं, बल्कि कई तकनीकी समस्याओं की शिकायतें भी सामने आईं। शिक्षकों को भुगतान में देरी, सिस्टम के बार-बार फेल होने और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में लंबा समय लगने को लेकर भी नाराजगी बढ़ती गई।

OSM में खामियों की हो रही जांच

इस पूरे विवाद के बाद शिक्षा मंत्रालय ने मामले को गंभीर मानते हुए आंतरिक जांच शुरू कर दी है। मंत्रालय ने एक हाई-लेवल कमेटी गठित करने के निर्देश भी दिए हैं, जो ओएसएम सिस्टम, टेंडर प्रक्रिया और उससे जुड़ी तकनीकी व प्रशासनिक कमियों की विस्तार से जांच करेगी। इसके अलावा री-इवैल्यूएशन पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी क्षमता की भी समीक्षा की जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि मामला केवल तकनीकी खराबी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें निगरानी और प्रक्रिया स्तर पर बड़ी चूक की आशंका भी नजर आ रही है।

Updated on:
02 Jun 2026 09:13 pm
Published on:
02 Jun 2026 09:07 pm