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Suvendu Adhikari: कोलकाता में दिव्यांग पति को पीठ पर लाद कर ‘जनता दरबार’ पहुंची महिला; सीएम ने दिया भरोसा

Suvendu Adhikari Cabinet: सुंदरबन से आई एक महिला अपने दिव्यांग पति को पीठ पर बैठा कर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की जन शिकायत सभा में पहुंची। सीएम ने उनकी आवास और वाहन की मांग सुनते हुए 7 दिनों के अंदर समाधान करने का भरोसा दिया है।

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भारत

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MI Zahir

Jun 02, 2026

Woman carries disabled husband on back to Suvendu's Janata Darbar

कोलकाता में एक महिला अपने निशक्त पति को पीठ पर लाद कर शुभेंदु अधिकारी के जनता दरबार लाई। ( फोटो: IANS)

West Bengal Politics : पश्चिम बंगाल के सॉल्ट लेक स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की जन शिकायत बैठक (जनता दरबार) में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया। सुंदरबन के सुदूर इलाके से आई एक जांबाज महिला अपने दिव्यांग पति को पीठ पर लाद कर मुख्यमंत्री के सामने अपनी गुहार लगाने पहुंची थी। यह जनसंपर्क कार्यक्रम राज्य के आम नागरिकों को सीधे सूबे के मुखिया के सामने अपनी परेशानियां रखने और त्वरित समाधान पाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।

7 दिनों में समस्या सुलझाने का मिला आश्वासन

सीएम से मुलाकात के बाद पीड़ित संन्यासी मंडल ने बताया कि वह और उनकी पत्नी राज्य सरकार से मदद की आस लेकर सुंदरबन से कोलकाता आए थे। मंडल ने कहा,हम बेहद बेसहारा हैं। दिव्यांग होने के कारण मैंने अपने लिए एक आशियाने (आवास सहायता) और आने-जाने के लिए एक इलेक्ट्रिक वाहन की मांग की है। इसके अलावा मेरी पत्नी को 'लक्ष्मी भंडार' योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। मुख्यमंत्री जी ने हमारी पूरी बात बहुत ध्यान से सुनी और भरोसा दिया है कि आगामी 7 दिनों के भीतर हमारी सभी समस्याओं का निवारण कर दिया जाएगा।'

शुभेंदु सरकार का पहला बड़ा कैबिनेट विस्तार

इस मानवीय घटना के बीच, पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल भी देखने को मिला। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नवनिर्वाचित भाजपा सरकार ने अपनी मंत्रिपरिषद का पहला बड़ा विस्तार किया है। कोलकाता के लोक भवन में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में कुल 35 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। राज्यपाल आर.एन. रवि ने सभी नए मंत्रियों को शपथ ग्रहण करवाई। इस विस्तार के साथ ही अधिकारी सरकार में मंत्रियों की कुल संख्या अब 41 पर पहुंच गई है। सरकार का मानना है कि इस कदम से विभिन्न सरकारी विभागों के कामकाज में तेजी आएगी और शासन व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।

युवा, शिक्षित और हर वर्ग को समेटे हुए है नया मंत्रिमंडल

शपथ लेने वाले प्रमुख विधायकों में दीपक बर्मन, अर्जुन सिंह, शंकर घोष, गौरी शंकर घोष, तपश रॉय, मनोज कुमार ओरांव, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, अजॉय पोद्दार, स्वपन दासगुप्ता, शरद्वत मुखर्जी और कल्याण चक्रवर्ती जैसे नाम शामिल हैं। इस नए मंत्रिमंडल की कुछ खास विशेषताएं इस प्रकार हैं। 294 सदस्यीय विधानसभा में 208 सीटें जीतकर बीजेपी ने राज्य में पहली बार सरकार बनाई है, जिससे टीएमसी का 15 साल पुराना शासन खत्म हुआ। 55 वर्षीय सुवेंदु अधिकारी ने 9 मई को मुख्यमंत्री पद संभाला था।

मथाभंगा के विधायक निशित प्रमाणिक सबसे युवा चेहरा

इन मंत्रियों की औसत आयु 57 वर्ष है। चार मंत्री 50 साल से कम उम्र के हैं, जिनमें मथाभंगा के विधायक निशित प्रमाणिक सबसे युवा चेहरा हैं। मंत्रिमंडल के 83% (15 मंत्री) स्नातक या उससे ऊपर की डिग्री रखते हैं, जबकि 67% (12 सदस्य) पोस्ट ग्रेजुएट हैं। इसके अलावा 3 मंत्रियों के पास पीएचडी की मानद उपाधि है।सामाजिक ताने-बाने को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल में 13 अलग-अलग जाति समूहों को जगह दी गई है, जिसमें बंगाल के शीर्ष 10 जाति समूहों में से 8 का प्रतिनिधित्व शामिल है।

शुभेंदु सरकार के सामने बड़ी चुनौती

'दिव्यांग पति को पीठ पर उठा कर लाती महिला की यह तस्वीर शुभेंदु सरकार के सामने जमीनी स्तर पर जन कल्याणकारी योजनाओं को तुरंत लागू करने की बड़ी चुनौती को दर्शाती है। वहीं, मुख्यमंत्री द्वारा 7 दिन में मदद का भरोसा देना यह दिखाता है कि नई सरकार अपनी छवि 'जनता की सरकार' के रूप में स्थापित करना चाहती है।'

आगामी घटनाक्रम पर नजर

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मुख्यमंत्री कार्यालय सुंदरबन के इस जरूरतमंद परिवार को अगले एक हफ्ते के भीतर इलेक्ट्रिक वाहन और आवास मुहैया करा पाता है या नहीं। साथ ही नए मंत्रियों को विभागों का बंटवारा होने के बाद सरकार की रफ्तार कैसी रहती है, यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा।

योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल

इस मामले ने राज्य में पहले से चल रही 'लक्ष्मी भंडार' और आवास योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर भी एक साइड एंगल खोल दिया है। आखिर क्यों एक अत्यंत पात्र और दिव्यांग परिवार को सुंदरबन से कोलकाता तक का सफर इस तरह तय करना पड़ा? यह प्रशासनिक सजगता पर भी एक विचारणीय बिंदु है। (इनपुट: ANI)