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Meenakshi Natarajan: राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद बवाल मचाने पर भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस ​को घेरा

Controversy:मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने पर सियासी घमासान मच गया है। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने जहां कांग्रेस की नीयत पर सवाल उठाए हैं, वहीं कांग्रेस ने इसे चुनाव आयोग के सामने चुनौती दी है।

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Jun 10, 2026
MP Rajya Sabha Election Controversy

Nomination : कांग्रेस नेत्री मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के बाद शुरू हुए विवाद पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मध्य प्रदेश से राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का परचा खारिज होने पर मचे बवाल की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार का नामांकन निरस्त होने के बाद कांग्रेस जिस तरह का राजनीतिक विमर्श खड़ा कर रही है, उससे उसका असली चेहरा और आंतरिक कलह देश के सामने आ गई है।

त्रिवेदी बोले, कांग्रेस ने हार देख कर जानबूझ कर ऐसा दोषपूर्ण फॉर्म भरा ?

सुधांशु त्रिवेदी ने इस मामले की परतों को खोलते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस उम्मीदवार ने जानबूझकर अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित आपराधिक मामले की जानकारी छुपाई। उन्होंने बताया कि यह मामला तेलंगाना की ही एक महिला कांग्रेस कार्यकर्ता द्वारा वहां के एक स्थानीय पार्टी नेता पर शोषण के आरोपों से जुड़ा हुआ है, जिसमें तत्कालीन राज्य प्रभारी होने के नाते मीनाक्षी नटराजन को भी पक्षकार बनाया गया था। चुनावी नियमों के तहत हर उम्मीदवार को अपने सभी मुकदमों की पारदर्शिता से जानकारी देनी होती है। त्रिवेदी ने सवाल दागा कि जब तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार है, तो उन्होंने कोर्ट से इस केस के बंद होने का लिखित दस्तावेज क्यों नहीं लिया? क्या कांग्रेस ने अपनी तय हार को देखकर जानबूझकर ऐसा दोषपूर्ण फॉर्म भरा?

कांग्रेस ने 'सीट की चोरी' और 'लोकतंत्र की हत्या' करार दिया

दूसरी तरफ, इस घटनाक्रम को कांग्रेस ने 'सीट की चोरी' और 'लोकतंत्र की हत्या' करार दिया है। इस फैसले के खिलाफ केसी वेणुगोपाल, अभिषेक मनु सिंघवी और दिग्विजय सिंह सहित कांग्रेस के शीर्ष दिग्गजों का एक प्रतिनिधिमंडल सीधे चुनाव आयोग पहुंच गया। वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के निर्णय को कानूनी रूप से गलत बताते हुए कहा कि यह फैसला वैसा ही है जैसे कोई 2+2=7 लिख दे।

देश की संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा : मीनाक्षी नटराजन

सिंघवी का तर्क है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33ए के तहत केवल उन्हीं मामलों का खुलासा जरूरी है जिनमें आरोप तय हो चुके हों और 2 साल से अधिक की सजा का प्रावधान हो, जबकि नटराजन के मामले में कोर्ट ने अभी संज्ञान तक नहीं लिया था। फिलहाल, मीनाक्षी नटराजन ने कहा है कि उन्हें देश की संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा है और वे चुनाव आयोग के अंतिम फैसले का इंतजार कर रही हैं। (इनपुट : ANI)