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80% हिंदुओं के खिलाफ था उदयनिधि स्टालिन का बयान, बताया हेट स्पीच; मद्रास HC का बड़ा फैसला

पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि उदयनिधि स्टालिन का बयान 80 प्रतिशत हिंदुओं के खिलाफ था। कोर्ट ने टिप्पणी की, "जो व्यक्ति नफरत भरा भाषण देता है, उसे छोड़ दिया जाता है...

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Jan 21, 2026
उदयनिधि स्टालिन के बयान को कोर्ट ने बताया- हेट स्पीच (Photo-IANS)

Udayanidhi Sstalin Hate Speech: मद्रास हाई कोर्ट ने बीजेपी नेता अमित मालवीय के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री और युवा कल्याण एवं खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए विवादास्पद बयान को हेट स्पीच करार दिया। जस्टिस एस. श्रीमती की एकल पीठ ने कहा कि किसी विवादास्पद भाषण पर प्रतिक्रिया देने वाले व्यक्ति को दंडित करना अनुचित है, जबकि भाषण देने वाले व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

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कोर्ट ने क्या कहा?

पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि उदयनिधि स्टालिन का बयान 80 प्रतिशत हिंदुओं के खिलाफ था। कोर्ट ने टिप्पणी की, "जो व्यक्ति नफरत भरा भाषण देता है, उसे छोड़ दिया जाता है, लेकिन उसकी प्रतिक्रिया देने वालों पर कानून का रौद्र रूप दिखाया जाता है। यह दुखद है कि ऐसे मामलों में पुलिस और अदालतें भी मूल दोषी पर कार्रवाई नहीं करतीं।"

क्या था पूरा मामला?

बता दें कि 2023 में चेन्नई में 'सनातन ओझिप्पु सम्मेलन' (Sanatana Abolition Conference) में उदयनिधि स्टालिन ने कहा था कि कुछ चीजों का विरोध नहीं किया जाता, बल्कि उन्हें मिटा दिया जाता है। हम डेंगू, मच्छर, मलेरिया या कोरोना का विरोध नहीं करते, उन्हें खत्म करते हैं। इसी तरह सनातन धर्म का विरोध नहीं, बल्कि इसे समाप्त करना चाहिए।

BJP नेता ने शेयर की पोस्ट

उदयनिधि स्टालिन के इस बयान के बाद बीजेपी नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया था। उन्होंने लिखा, "उदयनिधि स्टालिन, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और डीएमके सरकार में मंत्री, ने सनातन धर्म को मलेरिया और डेंगू से जोड़ा... उनका मानना है कि इसे विरोध नहीं, बल्कि खत्म किया जाए। यानी वे भारत की 80% आबादी के नरसंहार की बात कर रहे हैं, जो सनातन धर्म का पालन करती है।"

बीजेपी नेता के खिलाफ दर्ज किया था मामला

इस पोस्ट के बाद तिरुचिरापल्ली पुलिस ने मालवीय के खिलाफ धारा 153, 153A, 504 और 505 के तहत FIR दर्ज की थी। आरोप था कि उन्होंने मंत्री के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की।

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Published on:
21 Jan 2026 03:07 pm
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