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राज्य में सभी प्राइवेट स्कूलों को वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर लिखनी होगी पूरी फीस, मद्रास हाईकोर्ट का फैसला

Madras High Court Decision: मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य में प्राइवेट स्कूलों के फीस स्ट्रक्चर पर बड़ा फैसला सुनाया है। क्या है यह फैसला? आइए नज़र डालते हैं।
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Jul 10, 2026
Madras High Court
मद्रास हाईकोर्ट (File Photo)

मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने एक अहम फैसले में तमिलनाडु (Tamil Nadu) के सभी प्राइवेट स्कूलों (Private Schools) को निर्देश दिया है कि वो अपनी फीस का स्ट्रक्चर सबके सामने रखें, जिससे परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के बारे में सही फैसला ले सकें। कोर्ट ने कहा कि बच्चों के लिए स्कूल चुनने का बोझ माता-पिता की जेब पर भारी नहीं पडऩा चाहिए। कोर्ट ने सभी प्राइवेट स्कूलों को आदेश दिया है कि उन्हें अपनी पूरी फीस वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर लिखनी होगी।

ज़िम्मेदारी से नहीं बच सकते

जस्टिस एम. धंडापानी ने कहा कि जब नियमों के तहत प्राइवेट स्कूलों को नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर फीस लिखना अनिवार्य किया गया है, तो वो यह कहकर अपनी ज़िम्मेदारी से नहीं बच सकते कि वो सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं हैं और जानकारी सार्वजनिक करने के लिए बाध्य नहीं हैं। मद्रास हाईकोर्ट बेंच ने स्पष्ट किया कि भले ही प्राइवेट स्कूल आरटीआई एक्ट के दायरे में नहीं आते, लेकिन तमिलनाडु प्राइवेट स्कूल्स (रेगुलेशन) रूल्स, 2023 के तहत फीस की जानकारी नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर प्रदर्शित करना उनका वैधानिक दायित्व है।

माता-पिता को पहले से मिलनी चाहिए जानकारी

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अच्छे स्कूल का चयन करना चाहते हैं, इसलिए उन्हें पहले से यह जानकारी मिलनी चाहिए कि स्कूल में कितनी फीस देनी होगी। दरअसल प्राइवेट स्कूलों के डायरेक्टर ने 1 जून को एक सर्कुलर जारी कर सभी प्राइवेट स्कूलों को निर्देश दिए थे कि वो अपनी फीस का स्ट्रक्चर सार्वजनिक करें और इसे नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर लगाएं। सरकारी विभाग के इस फैसले के खिलाफ ऑल इंडिया प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एसोसिएशन ने मद्रास हाईकोर्ट में ए याचिका दायर की थी। स्कूल एसोसिएशन की मांग थी कि सरकार के इस सर्कुलर पर तुरंत रोक लगाई जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

क्यों अहम है यह फैसला?

आमतौर पर देखा जाता है कि स्कूल में एडमिशन के समय या सेशन के बीच में कई प्राइवेट स्कूल अलग-अलग मदों (जैसे डेवलपमेंट फीस, एक्टिविटी चार्ज आदि) के नाम पर अभिभावकों से मोटी फीस वसूलते हैं। इसकी जानकारी पहले नहीं दी जाती। मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब एडमिशन से पहले ही माता-पिता को स्कूल की पूरी फीस के बारे में जानकारी मिल सकेगी और स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगेगी।

Updated on:
10 Jul 2026 03:40 am
Published on:
10 Jul 2026 03:37 am