
मुख्यमंत्री सी जोसफ विजय के पेरंबूर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को सवाल उठाया कि जब उम्मीदवार ने करीब 600 करोड़ रुपए की संपत्तियों का खुलासा किया हो, तब 30 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियों का उल्लेख न करना क्या अपने आप में भ्रष्ट आचरण माना जा सकता है?
जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने यह टिप्पणी उस आवेदन पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें मुख्यमंत्री ने अपने खिलाफ दायर चुनाव याचिका को शुरुआती चरण में ही खारिज करने की मांग की है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि लोकप्रिय अभिनेता रहे विजय के नाम पर बड़ी संख्या में संपत्तियां होना स्वाभाविक है और यह मानना कठिन है कि उन्होंने स्वयं बैठकर अपनी सभी संपत्तियों की सूची तैयार की होगी।
अदालत ने कहा कि संभव है यह काम किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट ने किया हो और यदि उससे कुछ संपत्तियां छूट गई हों तो क्या केवल इसी आधार पर चुनाव रद्द किया जा सकता है।
अदालत ने कहा- जब न्यायाधीशों को अपनी संपत्तियों का ब्योरा देना होता है तो वे भी अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में यदि किसी सीए से कुछ संपत्तियां छूट जाएं तो क्या उसके कारण चुनाव निरस्त किया जा सकता है?
पीठ ने यह भी पूछा कि जब चुनावी हलफनामे में लगभग 600 करोड़ रुपए की संपत्तियां घोषित की गई थीं तो 30 करोड़ रुपए की संपत्तियों का खुलासा न होना क्या वास्तव में भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आएगा।
अदालत ने याचिकाकर्ता से यह भी जानना चाहा कि क्या इस कथित चूक का मतदाताओं के निर्णय पर कोई वास्तविक प्रभाव पड़ा होगा। न्यायालय ने कहा कि यदि कोई मतदाता पहले से विजय को वोट देने का फैसला कर चुका था तो क्या 30 करोड़ रुपए की अतिरिक्त संपत्ति की जानकारी उसके मतदान व्यवहार को बदल देती।
यह चुनाव याचिका मतदाता एस दिनेश ने दायर की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के चुनावी हलफनामे में वित्तीय खुलासों से जुड़ी कई विसंगतियां हैं। वहीं, विजय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि याचिका में आवश्यक तथ्य पर्याप्त रूप से नहीं बताए गए हैं।
उनका कहना था कि मामूली विसंगतियों को चुनाव रद्द करने का आधार नहीं बनाया जा सकता, खासकर तब जब यह नहीं दिखाया गया हो कि उससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ है।