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Ajit Pawar की अंतिम विदाई: 500 किलो लकड़ियां, 25 किलो घी और 3000 जवानों का घेरा, बारामती में थम जाएंगी लाखों लोगों की सांसें

Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार का गुरुवार को बारामती में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा। 3000 जवानों की तैनाती और वीवीआईपी प्रोटोकॉल के बीच दी जाएगी विदाई।

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Jan 28, 2026
अजित पवार की विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई। ( फोटो: ANI)

Ajit Pawar last rites: महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे 'रिजल्ट ओरिएंटेड' नेता और उप मुख्यमंत्री अजित पवार Ajit Pawar की जीवन यात्रा का कल यानी 29 जनवरी 2026 को अंतिम पड़ाव होगा। बारामती के जिस मैदान से उन्होंने दशकों तक जनता की नब्ज को सहलाया, उसी विद्या प्रतिष्ठान परिसर में गुरुवार को उनका अंतिम संस्कार पूर्ण राजकीय सम्मान (State Funeral) के साथ किया जाएगा। प्रशासन ने 'दादा' की इस आखिरी विदाई को गरिमामय और ऐतिहासिक बनाने के लिए अभूतपूर्व प्रबंध किए हैं। अजित पवार का अंतिम संस्कार हिंदू वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार किया जाएगा। बारामती जिला प्रशासन और स्थानीय नगर निकाय ने इसके लिए विशेष सामग्री और स्थान का चयन किया है:

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चंदन और आम की लकड़ियां

प्रशासन के अनुसार अंतिम संस्कार के लिए लगभग 450 से 500 किलोग्राम सूखी लकड़ियों का इंतजाम किया गया है। इसमें शुद्ध चंदन की लकड़ी और आम की लकड़ियों का एक विशेष मिश्रण तैयार किया गया है, जो राजकीय विदाई की परंपरा का हिस्सा है।

शुद्ध घी और हवन सामग्री

विधि-विधान को संपन्न करने के लिए लगभग 25 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाला शुद्ध घी और औषधीय हवन सामग्री मंगवाई गई है।

पुष्प चक्र (Wreaths) मंगवाए गए

देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों की ओर से अर्पित किए जाने वाले विशेष पुष्प चक्रों के लिए पुणे और मुंबई के चुनिंदा बाजारों से फूलों की खेप मंगवाई गई है।

सुरक्षा का अभेद्य किला: बारामती में हाई अलर्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जैसे अति-विशिष्ट अतिथियों (VVIPs) के संभावित आगमन को देखते हुए बारामती को एक सुरक्षित छावनी में तब्दील कर दिया गया है:

अंतिम विदाई और जवानों की तैनाती

बहजत पवार की अंतिम विदाई में सुरक्षा के लिए 3,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। इसमें राज्य रिजर्व पुलिस बल (SRPF) की 5 कंपनियां और विशेष त्वरित कार्य बल (QRT) के दस्ते शामिल हैं।

ड्रोन और CCTV कैमरों से रहेगी नजर

पूरे अंतिम यात्रा मार्ग और संस्कार स्थल की निगरानी के लिए 200 से अधिक हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे सक्रिय किए गए हैं। सुरक्षा अधिकारी ड्रोन के माध्यम से आसमान से पल-पल की गतिविधि पर नजर रखेंगे।

अंतिम विदाई और ट्रैफिक डायवर्जन

बारामती के सभी प्रवेश द्वारों पर बैरिकेडिंग की गई है। केवल अधिकृत वाहनों और आपातकालीन सेवाओं को ही मुख्य क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

विरासत का वो आखिरी दर्शन

अजित पवार का पार्थिव शरीर वर्तमान में दर्शन के लिए रखा गया है, जहां उनके चाहने वाले हजारों लोग भारी मन से उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। गुरुवार सुबह 11 बजे 'गार्ड ऑफ ऑनर' (सलामी) के साथ उनकी अंत्येष्टि की मुख्य प्रक्रिया शुरू होगी। महाराष्ट्र की कैबिनेट के लगभग सदस्य और केंद्र के प्रतिनिधि इस ऐतिहासिक घड़ी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।

क्या है सियासी और सामाजिक माहौल ?

एकनाथ शिंदे: "हमने एक ऐसा साथी खोया है जो फाइलों की बारीकियों और जनता की जरूरतों को एक साथ समझता था। उनका राजकीय सम्मान के साथ विदा होना उनके महान कार्यों के प्रति हमारी कृतज्ञता है।"

सुप्रिया सुले: परिवार की ओर से समर्थकों से धैर्य बनाए रखने और 'दादा' की अंतिम यात्रा में शांतिपूर्ण तरीके से सहयोग करने की मार्मिक अपील की गई है।

स्थानीय नागरिक: बारामती के व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रख कर अपने नेता के प्रति गहरा सम्मान और शोक व्यक्त किया है।

विदाई के बाद की जांच और सियासत

अंतिम संस्कार के बाद सुरक्षा एजेंसियां और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) विमान हादसे की जांच की गति बढ़ाएंगे। 'ब्लैक बॉक्स' के डेटा का गहराई से विश्लेषण किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह सिर्फ एक तकनीकी चूक थी या इसमें कोई अन्य पहलू भी शामिल है। इसके साथ ही, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में 'पावर ऑफ सक्सेशन' को लेकर भी राजनीतिक मंथन तेज होने की संभावना है।

अनुशासन की अनूठी मिसाल

अजित पवार अपनी कड़क कार्यशैली और समय की पाबंदी के लिए पूरे देश में विख्यात थे। अधिकारियों का कहना है कि उनकी अंतिम विदाई का पूरा कार्यक्रम ठीक उसी 'टाइम-टेबल' के अनुसार तय किया गया है, जिसका पालन वे खुद सरकारी बैठकों में करते थे। प्रशासन की ओर से समय का यह सटीक पालन उनके व्यक्तित्व के प्रति दी जाने वाली सबसे अनूठी श्रद्धांजलि मानी जा रही है।

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