
Great Nicobar Project Defense: केरल के कन्नूर में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को 'स्कैम' (घोटाला) करार देने पर रिटायर्ड मेजर जनरल पी विवेकानंदन ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट भारत की समुद्री सुरक्षा, आर्थिक हितों और क्षेत्रीय स्वतंत्रता को मजबूत करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
मेजर जनरल (रिटायर्ड) विवेकानंदन ने विस्तार से समझाया कि चीन लंबे समय से 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति के तहत भारत के आसपास बंदरगाह विकसित कर भारत की समुद्री गतिशीलता को सीमित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि 2008 के बाद से हम ग्रेट निकोबार द्वीप के विकास में रुके हुए हैं। अब हमें इस क्षेत्र को तेजी से विकसित करना चाहिए, ताकि हम अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा कर सकें और किसी भी अनचाहे तत्व द्वारा हमारी आवाजाही पर रोक न लगे।
मेजर जनरल ने अंतरराष्ट्रीय ट्रांस-शिपमेंट कंटेनर टर्मिनल विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने सिंगापुर और दुबई जैसे विश्व स्तरीय बंदरगाहों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत को भी ऐसा ही आर्थिक केंद्र विकसित करना चाहिए। वर्तमान में भारत को इस तरह के ट्रांस-शिपमेंट के लिए विदेशी बंदरगाहों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। अगर अडानी या अन्य औद्योगिक समूहों को इस प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है, तो इसका मतलब क्षेत्र को उन्हें बेचना नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय हित में विकास सुनिश्चित करना है।
उन्होंने पर्यावरण, पारिस्थितिकी और तटीय क्षेत्रों से जुड़ी चिंताओं को भी स्वीकार किया। उन्होंने जोर दिया कि इन मुद्दों का समाधान स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर सस्टेनेबल तरीके से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन इन मुद्दों से पूरी तरह अवगत है और स्थानीय लोगों के साथ समन्वय बनाकर समाधान निकालने पर काम कर रहा है।
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत के अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में स्थित है, जो सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यह प्रोजेक्ट न केवल एक बड़े ट्रांस-शिपमेंट हब के रूप में विकसित होने जा रहा है, बल्कि रक्षा और आर्थिक दोनों मोर्चों पर भारत को मजबूती प्रदान करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते चीन के प्रभाव को देखते हुए निकोबार का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अनिवार्य हो गया है।