
दिल्ली में भारी विरोध प्रदर्शन के बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा है। खरगे ने कहा कि पीएम का काम अब सिर्फ दूसरों को ताना मारना और व्यंग्य करना रह गया है।
उन्होंने साफ कहा कि अपनी विश्वसनीयता पहले जनता के सामने साबित कीजिए, फिर दूसरों पर उंगली उठाइए। खरगे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार देश की समस्याओं को हल करने की बजाय सिर्फ शब्दों के खेल में उलझी हुई है।
खरगे ने संसद में पीएम मोदी के भाषण को लेकर साफ कहा कि कोई भी प्रधानमंत्री इस तरह की बातें नहीं कर सकता। उन्होंने कहा- पीएम मोदी दूसरों को ताना मारते हैं लेकिन खुद क्या किया है देश के लिए? हर प्रधानमंत्री समस्याओं का समाधान बताता है, न कि ऐसी बातें जो बाद में मजाक का पात्र बन जाएं।
उन्होंने आगे कहा कि देश की तरक्की तभी होगी जब ऐसी सोच वाले लोग सत्ता से दूर होंगे। खरगे का बयान पीएम के हालिया भाषण के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने विपक्ष पर कुछ तीखे हमले किए थे।
खरगे ने पीएम मोदी के पुराने बयान '56 इंच की छाती' का भी हवाला दिया। उन्होंने पूछा- वो 56 इंच की छाती कहां चली गई? आज दूसरों की आलोचना कर रहे हैं, लेकिन खुद की करनी क्या है?
उन्होंने कहा कि सरकार को पहले अपनी जवाबदेही साबित करनी चाहिए। इस बीच, खरगे ने राम मंदिर ट्रस्ट का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम ने खुद कानून बनाए और लोगों को नामित किया, लेकिन अब उनके अपने लोग ही मंदिर में चोरी कर रहे हैं।
पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए खरगे ने कहा- आपने अपने लोगों को ट्रस्ट बनाने को कहा ताकि चोरी हो सके। अब चोरी खुलेआम हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां विश्वास का दुरुपयोग हुआ है।
खरगे ने युवाओं के मुद्दे को भी जोरशोर से उठाया। नीट परीक्षा विवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लाखों छात्र घर छोड़कर पढाई कर रहे थे लेकिन अब उनकी जिंदगी बर्बाद हो गई है। किसकी वजह से छात्रों की जिंदगी तबाह हुई? मोदी सरकार और केवल पीएम मोदी की वजह से।
खरगे ने कहा कि सरकार इन मुद्दों को छुपाने के लिए दूसरों पर हमला कर रही है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें पीएम के इस बयान की निंदा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि भविष्य में ऐसी टिप्पणियों से बचें। उन्होंने कहा- देश की प्रगति तभी संभव है जब सत्ता में बैठे लोग समस्याओं का समाधान करें, न कि व्यंग्यबाजी करें।