
Congress President Mallikarjun Kharge Statement: मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के नॉमिनेशन पेपर खारिज होने को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दिया। अब इस पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का बयान सामने आया है। खरगे ने कहा कि उनका तर्क है कि हमें पहले चुनाव आयोग, फिर हाई कोर्ट और उसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने आगे कहा कि यह एक खास मामला है। जितना ज्यादा समय दिया जाएगा, यह मामला उतना ही लंबा खिंचेगा। इसीलिए हम चाहते थे कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में राहत दे। फिर भी, चूंकि कोर्ट ने ऐसा कहा है, इसलिए हम उसी के अनुसार हाई कोर्ट जाएंगे। हमारा मानना है कि यह खारिज करना गैर-कानूनी, अनैतिक और लोकतंत्र-विरोधी है।
कांग्रेस के दिग्गज नेता ने कहा कि सरकार ने जो किया है, वह गलत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंजूरी या निर्देश के बिना इतने बड़े कदम नहीं उठाए जाते। हमारा मानना है कि ये कदम जानबूझकर कांग्रेस पार्टी को कमजोर करने और लोकतंत्र को कमजोर करने की एक बड़ी साजिश के तहत उठाए जा रहे हैं। हमारी नजर में, इन कदमों का मकसद विपक्ष को परेशान करना और दबाना है।
राज्यसभा नामांकन रद्द होने से जुड़ी उनकी याचिका को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने पर कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि यह एक अहम मामला है। इसे स्वीकार किया जाए या खारिज, कम से कम आज सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फैसला तो सुनाया है। हालांकि, भारत निर्वाचन आयोग ने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि लोकतंत्र को उस दिन झटका लगा जब छानबीन के दौरान नॉमिनेशन रद्द कर दिया गया। कॉर्पोरेट जगत के किसी व्यक्ति का नॉमिनेशन रद्द नहीं होता, लेकिन संवैधानिक मूल्यों के लिए लड़ने वाली पार्टी के सदस्य का नॉमिनेशन रद्द कर दिया जाता है। इसलिए लोकतंत्र को झटका उसी दिन लगा। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। लंबे समय से हमारी पार्टी के नेता कहते आ रहे हैं कि पहले वोट की चोरी होती थी, और अब सीट की चोरी हो रही है।
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की नामांकन पत्रों की अस्वीकृति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। कोट ने कहा कि हम इस याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं और इसे खारिज किया जाता है। कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा ने पक्ष रखा। वहीं चुनाव आयोग की तरफ से दामा शेषाद्री नायडू पेश हुए। अंत में याचिका खारिज हो गई और मीनक्षी नटराजन को राहत नहीं मिल सकी।