
Mamata Banerjee Kalighat Meeting: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) इन दिनों अपने सबसे बड़े अंदरूनी संकट का सामना करती नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव में भाजपा से मिली करारी हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री रह चुकीं और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई अहम बैठक में ज्यादातर सांसद और विधायक नहीं पहुंचे।
शुक्रवार को कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास पर आयोजित बैठक में केवल 8 विधायक शामिल हुए, जबकि पार्टी के अधिकांश सांसद और विधायक अनुपस्थित रहे। इस घटनाक्रम ने TMC में बढ़ती बगावत और नेतृत्व के खिलाफ असंतोष की अटकलों को और तेज कर दिया है।
तृणमूल कांग्रेस के पास लोकसभा में 28 सांसद हैं, लेकिन बैठक में सिर्फ 4 सांसद ही पहुंचे। राज्यसभा में पार्टी के 13 सांसद हैं, जिनमें से केवल 2 सांसद बैठक में शामिल हुए, जबकि 11 सांसद नदारद रहे।
बैठक में शामिल होने वालों में अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन जैसे नेता मौजूद थे। वहीं विधायकों में फिरहाद हकीम, मदन मित्रा, कुनाल घोष, बीना मंडल, आशिमा पात्रा, सोवनदेब चट्टोपाध्याय, बिमान बनर्जी और अशोक देव शामिल रहे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इतनी कम उपस्थिति पार्टी नेतृत्व के लिए चिंता का विषय है और यह संगठन के भीतर बढ़ती दूरी का संकेत भी हो सकता है।
हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भारी जीत दर्ज करते हुए सत्ता हासिल कर ली। चुनाव में TMC को बड़ा झटका लगा और पार्टी सत्ता से बाहर हो गई। इसके बाद से ही पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने खुलकर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने भी 58 बागी विधायकों के समूह को विधानसभा में प्रमुख विपक्षी गुट के रूप में मान्यता दे दी।
ऋतब्रत बनर्जी का कहना है कि उनके समर्थन में विधायकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ दो-तिहाई से अधिक विधायक हैं और विधानसभा सत्र के दौरान यह संख्या और बढ़ सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल उन्होंने सांसदों से कोई बातचीत नहीं की है, लेकिन विधायक लगातार उनके साथ जुड़ रहे हैं। बागी खेमे का दावा है कि मौजूदा नेतृत्व शैली से कई नेता और विधायक असंतुष्ट हैं।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि कई TMC नेता भाजपा के संपर्क में हैं। सूत्रों के मुताबिक, करीब 20 सांसद भाजपा नेताओं के संपर्क में बताए जा रहे हैं। अगर आने वाले दिनों में और नेता पार्टी छोड़ते हैं तो यह TMC के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
इस बीच कोलकाता के मेयर और TMC के वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि वह प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पा रहे थे और पद की गरिमा बनाए रखने के लिए उन्होंने यह फैसला लिया।
उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब पार्टी पहले से ही राजनीतिक संकट और अंदरूनी खींचतान से जूझ रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TMC इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। चुनावी हार, बागी विधायकों की बढ़ती संख्या, सांसदों की नाराजगी और वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफे ने पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ा दिया है।
ममता बनर्जी लगातार विधायकों और नेताओं से संपर्क कर स्थिति संभालने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन बैठक में बेहद कम मौजूदगी ने यह संकेत दे दिया है कि पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या ममता बनर्जी बागी नेताओं को मनाने में सफल होंगी या फिर TMC के भीतर का यह संकट आने वाले दिनों में और गहरा जाएगा।