
ममता बनर्जी के एक और राज्य सभा सांसद ने दिया इस्तीफा। (फोटो-ANI)
Mamata Banerjee Kalighat Meeting: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद पूर्व सीएम ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस टूट गई है। अपना बिखरा हुआ कुनबा संभालने के लिए दीदी ने पूरी ताकत झोंक दी है। तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक ममता बनर्जी ने बागी और असमंजस में पड़े विधायकों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क साधा है। आगे दलबदल को रोकने और अपने 28 साल के इतिहास में पहली बार विभाजन का सामना कर रही पार्टी को एकजुट रखने के प्रयास में आज कोलकाता के अपने कालीघाट आवास पर एक बैठक बुलाई है।
भाजपा द्वारा बंगाल में ममता बनर्जी के 15 साल के शासन को समाप्त करने के बाद पार्टी में मचे आंतरिक संकट से जूझ रही 71 वर्षीय ममता बनर्जी ने पिछले दो दिनों में हावड़ा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर के कई विधायकों को फोन किया है। इनमें से कई विधायकों को निष्कासित विधायक ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे की बैठकों में देखा गया।
टीएमसी के 80 विधायकों में से 58 विधायकों द्वारा विपक्ष के नेता के रूप में ऋतव्रत बनर्जी की नियुक्ति का समर्थन करने के बाद बुधवार को ऋतव्रत खेमे ने टीएमसी के विधायक दल पर नियंत्रण हासिल कर लिया, इस दावे को विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने स्वीकार कर लिया। यह विवाद कालीघाट में हुई एक अन्य बैठक से शुरू हुआ, जहां आरोप सामने आए कि विपक्ष के नेता के रूप में उनकी नियुक्ति का प्रस्ताव देने वाले पत्र पर कई विधायकों के हस्ताक्षर जाली थे।
टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि वह विधायकों से व्यक्तिगत रूप से बात कर रही हैं और उनसे शुक्रवार को कालीघाट में होने वाली बैठक में शामिल होने का अनुरोध कर रही हैं। प्रयास यह है कि संवाद के रास्ते खुले रहें और सुलह की संभावना तलाशी जाए। इस बैठक को व्यापक रूप से उन विधायकों पर ममता बनर्जी की निरंतर पकड़ की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है, जिन्होंने दल बदल लिया है।
जिस नुकसान को वह रोकने की कोशिश कर रही हैं, वह विधानसभा तक ही सीमित नहीं है। पूर्व परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती समेत कई नेताओं के साथ-साथ 100 से अधिक नगर पार्षदों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। स्नेहाशीष चक्रवर्ती ने बुधवार को इस्तीफा दिया। यह जनसंपर्क अभियान केवल विधानसभा तक ही सीमित नहीं है। टीएमसी के लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सदस्य हैं और नेतृत्व को डर है कि यह विद्रोह उसके संसदीय सदस्यों तक भी फैल सकता है।
Updated on:
5 Jun 2026, 6:43 PM IST
Published on:
5 Jun 2026, 6:43 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.