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Mamata Banerjee: सदन में चांदी का कड़ा रखने के बाद रात 3 बजे ममता बनर्जी का बजा फोन, राजीव गांधी ने ममता से क्या कहा?

Bengal Politics: 2021 के विधानसभा चुनाव में TMC ने 213 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं बीजेपी ने 77 सीटें अपने नाम की।

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Mar 12, 2026
बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Photo-IANS)

Mamata Banerjee: बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) होने हैं। ममता बनर्जी की टीएमसी (TMC) और बीजेपी के बीच मुकाबला माना जा रहा है। प्रदेश में कांग्रेस और लेफ्ट का वर्चस्व कम हो गया है। 2021 के विधानसभा चुनाव में TMC ने 213 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं बीजेपी ने 77 सीटें अपने नाम की। कांग्रेस और लेफ्ट के हाथ खाली रहे। एक तरफ बीजेपी सत्ता में काबिज होने का प्रयास कर रही है, दूसरी तरफ ममता के सामने अपना किला बचाने की चुनौती होगी।

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जब ममता, राजीव से मिली

1983 में कोलकाता में कांग्रेस का कन्वेंशन हुआ। इसमें ममता बनर्जी को VVIP डेलीगेट्स की देखभाल की जिम्मेदारी मिली थी। यहीं वो समय था, जब ममता बनर्जी पहली बार राजीव गांधी से मिली थी। अगले ही साल यानी 1984 में पीएम इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी। जिस समय इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी उस समय राजीव गांधी बंगाल में थे।

1984 में बनीं पहली बार सांसद

1984 में ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के जादवपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में ममता ने उस समय के वरिष्ठ वामपंथी नेता सोमनाथ चटर्जी को हराकर बड़ी राजनीतिक जीत हासिल की थी। दरअसल, जादवपुर को वामपंथियों का गढ़ कहा जाता था। कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता इस सीट से चुनाव लड़ने के लिए डरते थे। जब ममता जावदपुर से चुनाव लड़ रही थीं, तब लेफ्ट ने चुनाव प्रचार के दौरान उनके खिलाफ दुष्प्रचार करना शुरू कर दिया। इसके बाद भी ममता नहीं हटी और जीत दर्ज की। इस जीत से उनकी राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत पहचान बनी।

ममता पर था राजीव गांधी का हाथ

राजीव गांधी ममता के साथ ढाल की तरह हमेशा खड़े रहते थे। एक दिन संसद भवन में राजीव गांधी ने ममता को बुलाया। इससे ममता घबरा गई। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या हुआ? लेकिन जब वह मिलने गई तो राजीव ने उनसे कहा- चिंता मत करों मैं तुम्हारे साथ हूं। अब मैं तुम्हें यूथ कांग्रेस का महासचिव नियुक्त करना चाहता हूं।

ममता ने सदन में रखा चांदी का कड़ा

नंवबर 1988 में हरियाणा के सीएम देवीलाल की बहू सुप्रिया की संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से मौत हो गई। देवीलाल परिवार ने इसे हादसा बताया, लेकिन कांग्रेस ने हत्या का आरोप लगाया। बाद में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया था।

ममता बनर्जी ने सदन में इस मुद्दे को उठाया और सीबीआई जांच की मांग की। विपक्षी सांसद ममता का समर्थन करने के बजाए उन्हें बार-बार टोक रहे थे। ममता बनर्जी ने उस समय चांदी का कड़ा पहना हुआ था। सदन में उन्होंने इस कड़े को उतारा और मुध दंडवते के सामने रख दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर आप लोगों में हिम्मत नहीं है तो इसे पहनकर घर बैठ जाइए।

ममता की सीट पर सांसद ने रखे जूते

जवाब में तेलुगु देशम पार्टी के एक सांसद ने विरोध स्वरूप ममता बनर्जी की टेबल पर अपने जूते रख दिए थे। इसके बाद सदन में भारी हंगामा हुआ। रात करीब 3 बजे अचानक ममता बनर्जी का फोन बजा। दूसरी तरफ से आवाज आई- बधाई हो। आज तुमने सदन में औरतों का मान रखा, जिन्होंने तुम्हारी सीट पर जूते रखे उनका मुहतोड़ जवाब दो। यह बात प्रधानमंत्री राजीव गांधी बोल रहे थे।

1989 में ममता बनर्जी को मिली हार

हालांकि इसके बाद प्रदेश में कांग्रेस में आपसी गुटबाजी बहुत बड़ी हो गई थी। 1989 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा। ममता के समर्थक मानते थे कि कांग्रेस ने लेफ्ट के साथ मिलकर ममता को हराया है। इसके बाद ममता ने अपना पूरा ध्यान बंगाल की तरफ लगा दिया। 

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