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मणिक्कम टैगोर बने तमिलनाडु कांग्रेस के नए अध्यक्ष, पुराने प्रेसिडेंट को मलिक्कार्जुन खरगे ने हटाया

Tamil Nadu Pradesh Congress President: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मणिक्कम टैगोर को तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। जानें क्यों लिया गया ऐसा फैसला?
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Jun 27, 2026
Congress Tamil Nadu
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे। (फोटो- IANS)

तमिलनाडु कांग्रेस में बड़ा बदलाव हो गया है। कांग्रेस आलाकमान ने शनिवार को मणिक्कम तागोर को तमिलनाडु कांग्रेस का नया अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। सीएम विजय की पार्टी टीवीके के साथ राज्य में सरकार बनाने के बाद कांग्रेस का यह पहला बड़ा फैसला है।

इस फैसले के बाद यह माना जा रहा है कि पार्टी राज्य में अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पुराने अध्यक्ष के सेल्वापेरुन्थगई की जगह अब टैगोर कांग्रेस की कमान संभालेंगे।

क्यों हुआ यह बदलाव?

कांग्रेस पार्टी लंबे समय से तमिलनाडु में मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है। डीएमके के साथ गठबंधन के बावजूद पार्टी की अपनी संगठनात्मक ताकत कमजोर रही है। कई नेता और कार्यकर्ता मानते थे कि पुरानी नेतृत्व व्यवस्था में नई ऊर्जा की कमी है।

मणिक्कम को लाकर पार्टी ने एक सक्रिय और युवा चेहरा चुना है, जो संसद में भी सक्रिय रहे हैं। टैगोर लोकसभा सांसद हैं और कांग्रेस के अंदर उन्हें अच्छा संगठनकर्ता माना जाता है।

उनका तमिलनाडु की स्थानीय राजनीति से गहरा जुड़ाव है। खासकर दक्षिणी जिलों में उनकी पहुंच अच्छी मानी जाती है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह बदलाव सिर्फ नाम का नहीं, बल्कि रणनीति का हिस्सा है।

मैदान में सक्रिय रहते हैं टैगोर

मणिक्कम टाइग कांग्रेस के उन नेताओं में शामिल हैं जो मैदान में उतरकर काम करते दिखते हैं। वे पहले भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर रहे हैं।

उनकी नियुक्ति को पार्टी के अंदर कुछ लोग राहत की सांस के रूप में देख रहे हैं क्योंकि अब संगठन में नई गति आने की उम्मीद है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस फैसले की घोषणा एक्स पर की। उन्होंने साफ कहा कि टैगोर तुरंत प्रभाव से अपना काम संभालेंगे। यह फैसला दिल्ली से लेकर चेन्नई तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं में चर्चा का विषय बन गया है।

तमिलनाडु कांग्रेस की चुनौतियां

तमिलनाडु में कांग्रेस का वजूद लंबे समय से सिकुड़ता जा रहा है। एक समय था जब पार्टी यहां मजबूत थी, लेकिन अब टीवीके, डीएमके और एआईएडीएमके जैसी क्षेत्रीय पार्टियां हावी हैं।

नए अध्यक्ष के सामने कई चुनौतियां हैं। पहला काम संगठन को चाक-चौबंद करना है। जिला स्तर पर कमजोर इकाइयों को मजबूत करना, युवाओं को जोड़ना और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना।

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