manoj agarwal appointed chief secretary west bengal: पूर्व मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल को मुख्य सचिव बनाए जाने पर टीएमसी ने खुला विरोध किया है । भारी बवाल के बाद CM शुभेंदु अधिकारी ने मनोज को मुख्य सचिव बनाने की वजह बताई है।
पश्चिम बंगाल में चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर मनोज अग्रवाल को राज्य का मुख्य सचिव बनाने पर भारी बवाल मचा है। पूर्व सीएम ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है।
अब राज्य में भारी विरोध के बाद बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकरी ने खुलकर बताया है कि क्यों मनोज अग्रवाल को राज्य का मुख्य सचिव बनाया गया है।
दरअसल, शुभेंदु अधिकारी मंगलवार को गुवाहाटी पहुंचे। वह असम में सीएम हिमंता बिस्व सरमा के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए।
शपथ समारोह के बाद जब शुभेंदु से पूछा गया- मनोज अग्रवाल को बंगाल में मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है, इस पर टीएमसी ने आपत्ति जताई है।
इसका जवाब देते हुए सीएम शुभेंदु ने कहा- वे (मनोज) केवल पूर्व CEO ही नहीं हैं, बल्कि राज्य के सबसे वरिष्ठ सिविल सेवक भी हैं। अगर कोई बात है, तो दूसरों से बात करें। हम कानून के मुताबिक ही काम कर रहे हैं।
2026 के विधानसभा चुनावों की पूरी जिम्मेदारी संभालने वाले मनोज अग्रवाल 1990 बैच के आईएएसअधिकारी हैं। उन्होंने बंगाल में शांतिपूर्ण तरीके से मतदान कराया, लेकिन टीएमसी लगातार आरोप लगाती रही कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी हुई और कई लाख लोगों को वोट देने का मौका नहीं मिला।
अब जब भाजपा सरकार बनी तो अग्रवाल को सबसे ऊंचे प्रशासनिक पद पर बिठा दिया गया। टीएसी नेता सकेत गोखले ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह 'बेशर्मी की हद' है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग और भाजपा अब खुलकर चुनाव चोरी का राज खोल रहे हैं। टीएमसी का कहना है कि चुनाव अधिकारी को तुरंत मुख्य सचिव बनाना निष्पक्षता पर सवाल उठाता है।
भाजपा ने 2026 में ऐतिहासिक जीत हासिल की और सुवेंदु अधिकारी पहली बार बंगाल के मुख्यमंत्री बने। शपथ ग्रहण के कुछ ही दिन बाद यह नियुक्ति हुई। कई लोग इसे तेज फैसलों के तौर पर देख रहे हैं, तो विपक्ष इसे बदला और पक्षपात बता रहा है।
टीएमसी अब कोर्ट जाने या और आंदोलन की तैयारी कर रही है। इस बीच आम लोगों में चर्चा है कि क्या नई सरकार पुरानी सिस्टम को बदल पाएगी या सियासी लड़ाई और तेज होगी।
अग्रवाल पहले कई अहम पदों पर काम कर चुके हैं। उनके कार्यकाल में बंगाल चुनाव बिना बड़े हिंसा के संपन्न हुए, जो सकारात्मक पक्ष माना जा रहा है। लेकिन विपक्ष इसे 'रिवॉर्ड' कहकर सवाल उठा रहा है।