
Ajmer Sharif Dargah Donation Scam: अयोध्या के राम मंदिर में कथित गबन की जांच के बीच अब मुस्लिम धार्मिक संस्थानों के फंड को लेकर नया मामला सामने आया है। ‘भारतीय समाज सेवक संगठन’ के अध्यक्ष और चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने बड़ा दावा किया है। उनके मुताबिक, मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों में मिलने वाले जकात और वक्फ के दान का रुपया बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल हुआ है।
उन्होंने कहा कि अगर राम मंदिर मामले की जांच हो सकती है। तो फिर मुस्लिम धार्मिक संस्थानों के फंड की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने कहा कि हाजी अली दरगाह, अजमेर शरीफ दरगाह सहित कई मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों में जकात के पैसे का गलत इस्तेमाल हुआ है। उन्होंने दावा किया कि करीब 40 हजार करोड़ रुपये का जकात फंड अपने असली मकसद तक नहीं पहुंचा।
उनका कहना है कि यह पैसा गरीब और जरूरतमंद मुसलमानों की शिक्षा, इलाज और विकास पर खर्च होना चाहिए था। लेकिन इसका इस्तेमाल निजी संपत्ति बनाने में किया गया। इसी वजह से समाज का गरीब वर्ग लगातार पिछड़ता गया और उसे योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका।
मौलाना ने यह भी आरोप लगाया कि वक्फ से जुड़े करीब 50 हजार करोड़ रुपये के दान का भी सही उपयोग नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।
मौलाना ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा राम मंदिर मामले में एसआईटी जांच के आदेश का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इसी तरह जकात और वक्फ फंड की भी जांच कराई जानी चाहिए। उनका मानना है कि धार्मिक दान जनता की आस्था से जुड़ा होता है। इसलिए उसके उपयोग में पूरी पारदर्शिता जरूरी है।
इधर, राम मंदिर में कथित गबन की जांच भी जारी है। जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, रिकॉर्ड में 79.85 लाख रुपये की चोरी दर्ज की गई है। वहीं जांच के दौरान कुछ लोगों से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने की भी जानकारी सामने आई है। सार्वजनिक दस्तावेजों के मुताबिक लवकुश, अनुकल्प मिश्रा और राम शंकर यादव उर्फ टीनू यादव का नाम भी जांच में सामने आया है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और अंतिम सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।