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भारत पर विदेशी कर्ज 72 लाख करोड़ के पार, देश की अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ेगा असर?

RBI रिपोर्ट के मुताबिक भारत का विदेशी कर्ज बढ़कर करीब 72.15 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। बढ़ती विदेशी उधारी को लेकर चिंता बढ़ी है, वहीं रिपोर्ट में निजी सेक्टर के बढ़ते कर्ज को बड़ी वजह बताया गया है।
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भारत

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Ankit Sai

Jul 01, 2026

RBI

भारतीय रिजर्व बैंक (Photo-ANI)

India Foreign Debt: भारत की अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसी बीच विदेशी कर्ज को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक की नई रिपोर्ट सामने आई है। RBI के मुताबिक मार्च 2026 के अंत तक भारत का कुल विदेशी कर्ज बढ़कर 762.8 अरब डॉलर यानी करीब 72.15 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कर्ज बढ़ने के पीछे निजी क्षेत्र की बड़ी भूमिका रही है, हालांकि भारत की आर्थिक स्थिति और विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी मजबूत बना हुआ है।

विदेशी कर्ज के साथ GDP अनुपात भी बढ़ा

RBI के आंकड़ों के अनुसार भारत का विदेशी कर्ज और GDP का अनुपात बढ़कर 20.8 फीसदी हो गया है। एक साल पहले यह 19.8 फीसदी था। इसका मतलब है कि देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ विदेशी उधारी का आकार भी बढ़ा है। हालांकि यह स्तर अभी भी नियंत्रण में माना जाता है और कई देशों की तुलना में भारत की स्थिति बेहतर है।

भारत का सबसे ज्यादा कर्ज डॉलर में

भारत का सबसे ज्यादा विदेशी कर्ज अमेरिकी डॉलर में है। मार्च 2026 तक कुल विदेशी कर्ज का 55.5 फीसदी हिस्सा डॉलर में था। इसके बाद भारतीय रुपये की हिस्सेदारी 29.4 फीसदी रही। जापानी येन में 6.4 फीसदी, SDR में 4.3 फीसदी और यूरो में 3.7 फीसदी कर्ज दर्ज किया गया। वहीं डॉलर में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत के विदेशी कर्ज पर पड़ सकता है।

सरकार नहीं, प्राइवेट सेक्टर का कर्ज बढ़ा

RBI कि रिपोर्ट में एक अहम बात यह सामने आई कि हालिया बढ़ोतरी में सरकार की विदेशी उधारी की भूमिका कम रही है। वहीं निजी क्षेत्र का विदेशी कर्ज बढ़ा है। नॉन-फाइनेंशियल कॉरपोरेट कंपनियों के पास कुल विदेशी कर्ज का 36.4 फीसदी हिस्सा है। कंपनियां विदेशी बाजारों से कम लागत पर पैसा जुटाने के लिए बाहरी कर्ज का इस्तेमाल कर रही हैं।

शॉर्ट टर्म कर्ज ने बढ़ाई चिंता

RBI के मुताबिक एक साल या उससे कम समय में चुकाए जाने वाले शॉर्ट टर्म विदेशी कर्ज की हिस्सेदारी बढ़कर 19.6 फीसदी हो गई है। पिछले साल यह 18.3 फीसदी थी। ऐसे कर्ज को ज्यादा संवेदनशील माना जाता है क्योंकि इसे जल्दी वापस करना होता है। अगर वैश्विक बाजार में परेशानी आती है या डॉलर मजबूत होता है तो इसका दबाव बढ़ सकता है। विदेशी मुद्रा भंडार के मुकाबले शॉर्ट टर्म कर्ज का अनुपात भी बढ़कर 21.6 फीसदी हो गया है।

राहत की बात क्या है?

विदेशी कर्ज बढ़ने के बावजूद कुछ संकेत भारत के लिए सकारात्मक हैं। RBI के अनुसार कुल विदेशी कर्ज में लंबी अवधि वाले कर्ज की हिस्सेदारी ज्यादा है। मार्च 2026 तक लॉन्ग टर्म डेट 613.5 अरब डॉलर रहा। इससे तुरंत भुगतान का दबाव कम रहता है। इसके अलावा कर्ज चुकाने का अनुपात, डेट सर्विसिंग रेशियो घटकर 5.8 फीसदी रह गया है, जो पिछले साल 6.6 फीसदी था।