मीडिया द्वारा आरोपी का नाम उजागर करने के मामले में सिक्किम हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। क्या है सिक्किम हाई कोर्ट का फैसला? आइए जानते हैं।
सिक्किम हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि मीडिया द्वारा किसी आरोपी के नाम का खुलासा करना कानूनन गलत नहीं है। जस्टिस भास्कर राज प्रधान की बेंच ने 'रब्देन शेरपा बनाम सिक्किम राज्य' मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी एफआईआर की सामग्री को रिपोर्ट करना 'मीडिया ट्रायल' नहीं माना जा सकता। अदालत के अनुसार प्रेस लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और समाज के प्रहरी के रूप में अपराध की सटीक जानकारी देना उसका कर्तव्य है।
इस मामले में याचिकाकर्ता रबदेन शेरपा पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं (68, 75, 64, 351) के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी। उन्होंने दावा किया कि सिक्किम के एक अखबार ने पुलिस की डेली सिचुएशन रिपोर्ट के आधार पर उनके और उनके नाबालिग बेटे का नाम प्रकाशित कर उनकी गोपनीयता का उल्लंघन किया और मीडिया ट्रायल किया। याचिकाकर्ता ने पुलिस को जांच सामग्री मीडिया को देने से रोकने और अखबार को रिपोर्ट हटाने का निर्देश देने की मांग की। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि एफआईआर सार्वजनिक दस्तावेज है। एक बार अपराध सार्वजनिक क्षेत्र में आ जाता है तो आरोपी की गोपनीयता का अधिकार समाप्त हो जाता है। एफआईआर की सामग्री की रिपोर्टिंग को 'मीडिया ट्रायल' नहीं कहा जा सकता। रिपोर्ट में एफआईआर की सामग्री के साथ आरोपी के बेटे का पत्र भी प्रकाशित किया गया था, जो दोनों पक्षों को दिखाता है और निष्पक्ष रिपोर्टिंग है।