Mental Health Crisis: द लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार भारत में पिछले तीन दशकों में एंग्जायटी के मामलों में 123% की बढ़ोतरी हुई है। युवाओं में पढ़ाई, करियर और रिश्तों का दबाव मानसिक स्वास्थ्य संकट को गहरा कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में करोड़ों लोग डिप्रेशन और एंग्जायटी से जूझ रहे हैं, लेकिन बहुत कम लोगों तक जरूरी इलाज पहुंच पा रहा है।
Mental Health in India: तेज रफ्तार जिंदगी, भविष्य को लेकर असुरक्षा और कोविड-19 के बाद बदले सामाजिक हालातों ने मानसिक स्वास्थ्य संकट को गहरा कर दिया है। कभी मामूली बेचैनी मानी जाने वाली एंग्जायटी अब युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। मेडिकल जर्नल द लैंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पिछले तीन दशकों में एंग्जायटी के मामलों में 123.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है।
डिजिटल अलगाव में जी रहे युवा इससे सबसे बड़े शिकार हैं। वहीं, दुनिया भर में करीब 1.2 अरब लोग किसी न किसी मानसिक समस्या के साथ जीवन बिता रहे हैं, लेकिन सबसे गंभीर पहलू यह है कि डिप्रेशन और एंग्जायटी से जूझ रहे केवल 9 प्रतिशत लोगों तक ही न्यूनतम जरूरी इलाज पहुंच पा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार देश में कम से कम 15 करोड़ भारतीयों को तत्काल मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता है।
यही वजह है कि भारत सरकार वर्तमान में 'राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण-2' चला रही है। यह देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 2.5 लाख लोगों पर किया जा रहा है। 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के वयस्क व 13-17 वर्ष के किशोर इसमें शामिल है।
एंग्जायटी: 1990 में 2,591.9 मामले थे, अब 5,792.8 मामले हो गए।
डिप्रेशन: अवसाद के मामले 2,147.1 से बढ़कर 2,799.6 हो गए हैं।
सिजोफ्रेनिया: मतिभ्रम के मामले 316.3 से बढ़कर 321 प्रति लाख हो गए।
डिस्टीमिया: लगातार रहने वाला डिप्रेशन 902.4 से बढ़कर 948.8 हो गया।
रिपोर्ट बताती है कि मानसिक बीमारियों का सबसे बड़ा बोझ 15 से 19 वर्ष के किशोरों और युवाओं पर है। पढ़ाई, कॅरियर और रिश्तों का दबाव उनकी मानसिक स्थिति को लगातार प्रभावित कर रहा है। महिलाओं में एंग्जायटी व डिप्रेशन पुरुषों की तुलना में अधिक पाया गया। वहीं, पुरुषों में एडीएचडी, ऑटिज्म और व्यवहार संबंधी विकार ज्यादा सामने आ रहे हैं।
स्ट्रेस: यानी तनाव किसी बाहरी कारण जैसे ऑफिस का काम, परीक्षा या वित्तीय समस्या के प्रति दिमाग की एक तात्कालिक प्रतिक्रिया है। कारण खत्म होते ही स्ट्रेस आमतौर पर समाप्त हो जाता है।
एंग्जायटी: यह किसी स्पष्ट बाहरी कारण के बिना भी मन में लगातार डर या घबराहट है। यह बेचैनी व्यक्ति के भीतर 'बैकग्राउंड शोर' की तरह हमेशा गूंजती रहती है और रोजमर्रा के कामों को मुश्किल बना देती है।