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मिडिल ईस्ट तनाव का साइड इफेक्ट: भारत में अफवाहों ने बढ़ाई जमाखोरी, पेट्रोल 37% तो डीजल 20% ज्यादा बिका

ईरान और इजरायल-अमेरिका युद्ध की वजह से मिडिल ईस्ट में पैदा हुए तनाव का साइड इफेक्ट भारत पर साफ दिख रहा है। मिडिल ईस्ट तनाव और अफवाहों की वजह से भारत में महंगाई एवं जमाखोरी बढ़ी है।

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May 01, 2026
सांकेतिक AI इमेज

अमेरिका-ईरान युद्ध से उपजे पश्चिम एशिया संकट को 2 माह हो चुके हैं और गुरुवार को कच्चे तेल के दाम शुरुआत से 50% से ज्यादा तेजी के साथ 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए। इस युद्ध की ज्वाला अब भारतीय अर्थव्यवस्था और आम जन जीवन असर डालने लगी है। पेट्रोल-डीजल की किल्लत की अफवाहों से लेकर निर्यात ठप होने तक, युद्ध का असर हर सेक्टर पर दिखाई दे रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार और पेट्रोलियम कंपनियों ने आपूर्ति पर्याप्त होने का दावा किया है।

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मिडिल ईस्ट के बाद महंगाई बढ़ी, रोजगार पर संकट

मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल-अमेरिका संघर्ष की वजह से तनाव चरम पर है। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में भारत सरकार पर्याप्त आपूर्ति होने का दावा कर रही, लेकिन धरातल पर अफरा-तफरी और जरूरी चीजों की कीमतों में अस्थिरता का माहौल है। मार्च में खुदरा महंगाई वृद्धि दर 3.21% से बढ़कर 3.40% हो गई। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अप्रैल के आंकड़े इससे ज्यादा बड़े होंगे। महंगाई बढ़ने से आम आदमी की थाली से लेकर परिवहन तक महंगा हुआ है।

इसके अलावा देश में रोजगार पर संकट की तलवार लटक रही है। मार्च में देश के कुल निर्यात में 7 से 10 % की गिरावट आई है। विशेष रूप से UAE जैसे व्यापारिक साझेदारों के साथ निर्यात 62% फीसदी तक लुढ़क गया है। माल ढुलाई की लागत में कुछ रूटों पर 1000 फीसदी तक की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।

ईंधन क्षेत्र में अफवाहों के बीच रेकॉर्ड खरीद

कमी के संकट की आहट और तेल की कीमतों में वृद्धि की अफवाहों ने देश में ईंधन की मांग को कृत्रिम रूप से बढ़ा दिया है। बुधवार को पेट्रोल की बिक्री में 37% और डीजल की बिक्री में 20% का उछाल आया है। तेलंगाना में तो यह वृद्धि 101% (पेट्रोल) और 136% (डीजल) तक पहुंच गई है। इंडियन ऑयल ने कहा है कि देश के पास 12 दिन का पेट्रोल और 16 दिन का डीजल स्टॉक सुरक्षित है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने दावा किया है कि आपूर्ति श्रृंखला निर्बाध है और फिलहाल कीमतों में वृद्धि का कोई प्रस्ताव नहीं है।

LPG की कालाबाजारी और फर्जी खबरों का जाल

LPG सेक्टर में स्थिति ज्यादा तनावपूर्ण है। युद्ध संकट के बाद सरकार ने सिलेंडर की कीमत एक बार बढ़ा दी, लेकिन सोशल मीडिया पर बुधवार को गैस की कीमतों में भारी वृद्धि का एक फर्जी आदेश वायरल हो गया। जिसे सरकार ने तत्काल सिरे से नकारा। फिर भी, भविष्य की अनिश्चितता के डर से लोगों ने सिलेंडरों का स्टॉक करना शुरू कर दिया है, जिससे कालाबाजारी बढ़ गई है। प्रशासन ने अब तक 67 हजार से अधिक अवैध सिलेंडरों की जप्ती की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू गैस की उपलब्धता में कोई कमी नहीं है, नागरिक अफवाहों पर ध्यान न दें।

एविएशन सेक्टर में किराया बढ़ा

विमानन क्षेत्र युद्ध की सबसे सीधी मार झेल रहा है। एयर टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में 73 रुपए प्रति लीटर की भारी बढ़त दर्ज की गई है। ईंधन की लागत जो पहले कुल परिचालन व्यय का 40% होती थी, अब बढ़कर 60 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है। एयरलाइंस कंपनियों ने सरकार से टैक्स में कटौती की गुहार लगाई है। विमानन मंत्रालय में मंथन भी हुआ। यदि राहत नहीं मिली, तो मई के महीने में हवाई किराए में भारी वृद्धि और उड़ानों की संख्या में कटौती तय मानी जा रही है।

निर्यात का संकट: बंदरगाहों पर सड़ती सब्जियां और फल

खाड़ी के रास्ते होने वाला देश निर्यात पूरी तरह चरमरा गया है। युद्ध प्रभावित इलाकों और खाड़ी देशों को जाने वाले फल, सब्जी और डेयरी उत्पादों का निर्यात पिछले एक महीने से ठप है। बंदरगाहों पर करीब एक हजार कंटेनरों में माल फंसा हुआ है। इन कंटेनर्स में फल-सब्जियां खराब हो गई हैं। निर्यातकों को करोड़ों का नुकसान हुआ है। शिपिंग किराया 25% तक बढ़ गया है। निर्यातक अब नए ऑर्डर लेने से कतरा रहे हैं, जिसका सीधा असर आने वाले समय में घरेलू उत्पादकों और किसानों पर पड़ेगा।

बासमती और मसालों पर मार

भारत का गौरव माना जाने वाला बासमती चावल का निर्यात 80% तक गिर गया है। शिपिंग और लोडिंग चार्ज 1200 डॉलर से बढ़कर 3500 डॉलर प्रति कंटेनर तक पहुंच गया है। बंदरगाहों पर अभी भी चार लाख मीट्रिक टन बासमती अटका हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात न होने के कारण थोक बाजारों में बासमती के दाम गिर सकते हैं। मसालों और हस्तशिल्प का बाजार भी इसी तरह की मार झेल रहा है।

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