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“मेरे खिलाफ 38 मामले”, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान से बढ़ा विवाद, कांग्रेस ने चुनाव आयोग से की जांच की मांग

कैलाश विजयवर्गीय के 38 मामलों वाले बयान ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने चुनावी हलफनामे में जानकारी छिपाने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की है।
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Apr 16, 2026
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय

MP Politics: मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानबाजी को लेकर माहौल एक बार फिर गरमा गया है। नेताओं के पुराने मामलों और चुनावी हलफनामों को लेकर सवाल उठना आम बात हो गई है। इसी बीच कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल में अपने खिलाफ 38 “फेक केस” दर्ज होने की बात कही है। कांग्रेस ने इस बयान को आधार बनाकर मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं और चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि इतने मामले दर्ज थे तो उन्हें चुनावी हलफनामे में क्यों नहीं बताया गया।

नामांकन में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई

कांग्रेस ने दावा किया है कि मंत्री ने अपने नामांकन पत्र में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई। मध्य प्रदेश कांग्रेस मीडिया सेल के अध्यक्ष मुकेश नायक ने कहा कि मंत्री ने "खुद यह स्वीकार किया" है कि उनके खिलाफ मामले दर्ज हैं, लेकिन इंदौर विधानसभा क्षेत्र से नामांकन भरते समय उन्होंने इनका जिक्र नहीं किया। नायक ने कहा, "जिन आधारों पर अन्य चुनाव रद्द घोषित किए गए हैं, उन्हीं आधारों पर उनका चुनाव भी रद्द किया जाना चाहिए।" कांग्रेस का तर्क है कि यदि कोई उम्मीदवार अपने खिलाफ दर्ज मामलों को छिपाता है, तो यह मतदाताओं के साथ धोखा माना जा सकता है। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी ने कानूनी कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाया है।

चुनाव आयोग से जांच की मांग

कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद द्विवेदी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को औपचारिक शिकायत सौंपी है। शिकायत में भारतीय चुनाव आयोग से स्वत, संज्ञान लेने की अपील की गई है। पार्टी ने कहा कि अगर एक भी मामला छिपाया गया है, तो यह नियमों का उल्लंघन है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जिन मामलों का जिक्र मंत्री ने किया, उनमें गिरफ्तारी वारंट तक जारी हो सकते हैं। ऐसे में इन मामलों की गहन जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।

भाजपा की चुप्पी पर बढ़ा विवाद

इस पूरे मामले पर अभी तक भारतीय जनता पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं। विपक्ष लगातार दबाव बना रहा है कि पार्टी अपने मंत्री के बयान पर स्पष्ट रुख रखे। यह विवाद आने वाले समय में और गहरा सकता है, खासकर यदि चुनाव आयोग इस पर जांच शुरू करता है। इससे न केवल मंत्री की छवि प्रभावित हो सकती है, बल्कि राज्य की राजनीति में भी बड़ा असर देखने को मिल सकता है।

Updated on:
16 Apr 2026 05:52 pm
Published on:
16 Apr 2026 05:52 pm
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