
Pratap Sarnaik: महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना की महायुति सरकार के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। मीरा-भाईंदर में दोनों दलों के बीच चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। शिवसेना के नेता और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता पर भ्रष्टाचार, आदिवासियों की जमीन पर कब्जे और बढ़ते अपराधों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ भाजपा और शिवसेना लोकतंत्र बचाने की रैली निकाल रही हैं, वहीं मीरा-भाईंदर में लोकतंत्र को कुचला जा रहा है।
सरनाईक ने सोलापुर दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मीरा-भाईंदर में सेवेन-इलेवन नाम की कंपनी के मालिक नरेंद्र मेहता के खिलाफ कई गंभीर आरोप हैं। उन्होंने कंपनी के मालिक को लुटेरा बताते हुए कहा कि आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करने, स्थानीय लोगों की जमीन जबरन लेने और उनके मकान तोड़ने जैसी घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकारों और आम नागरिकों के साथ मारपीट की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।
मंत्री सरनाईक ने दावा किया कि सेवेन-इलेवन कंपनी से जुड़े नरेंद्र मेहता के करीबी कई पार्षदों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें दुष्कर्म और पॉक्सो जैसे मामले भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचित भाजपा विधायक के खिलाफ भी 21 मामले दर्ज हैं। इनमें जमीन पर कब्जे और दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। सरनाईक ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से इस मामले में ध्यान देने की मांग की।
सरनाईक ने कहा कि भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विचारों पर चलने वाली पार्टी है, लेकिन मीरा-भाईंदर में स्थानीय स्तर पर जो घटनाएं हो रही हैं, वे पार्टी की छवि के विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की मौजूदगी में भी कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अपने बचाव में कहा कि वे 20 साल तक मीरा-भाईंदर का प्रतिनिधित्व करते रहे, लेकिन उनके खिलाफ कभी पुलिस में शिकायत तक दर्ज नहीं हुई।
उन्होंने भाजपा नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन्होंने किसी की एक इंच जमीन पर भी कब्जा किया है तो उसका सबूत पेश किया जाए। सरनाईक ने यह भी दावा किया कि महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री ने विधानसभा में सेवेन-इलेवन कंपनी के मालिक नरेंद्र मेहता पर आदिवासियों की जमीन हड़पने के आरोपों का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा कि उनके आरोप निराधार नहीं हैं और भाजपा नेतृत्व को इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए।