MK Stalin Kolathur Election Result 2026: तमिलनाडु चुनाव 2026 में बड़ा उलटफेर, कोलाथुर सीट पर MK स्टालिन को TVK के VS बाबू ने करीब 9 हजार वोटों से हराया। 15 साल बाद ढहा स्टालिन का किला।
MK Stalin Kolathur Seat Result 2026: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर सामने आया है। राज्य के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को उनके मजबूत गढ़ कोलाथुर में हार का सामना करना पड़ा है। उन्हें तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) के उम्मीदवार वीएस बाबू ने करीब 9 हजार वोटों से हराया है। पिछले 15 साल से इस सीट पर लगातार जीत दर्ज करने वाले स्टालिन की यह हार राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
कोलाथुर सीट पर इस बार मुकाबला शुरू से ही दिलचस्प बना हुआ था। मतगणना के 22 राउंड के बाद तस्वीर पूरी तरह साफ हुई, जहां वीएस बाबू ने लगातार बढ़त बनाए रखी और आखिरकार जीत दर्ज की। यह नतीजा इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि स्टालिन इस सीट पर लंबे समय से मजबूत पकड़ बनाए हुए थे और उन्हें यहां लगभग अजेय माना जाता था।
एमके स्टालिन ने 2011 से कोलाथुर सीट पर लगातार जीत हासिल की थी। 2021 के चुनाव में उन्होंने बड़ी बढ़त के साथ जीत दर्ज की थी, जिससे यह सीट उनका सबसे सुरक्षित गढ़ बन गई थी। लेकिन इस बार बदलते राजनीतिक माहौल और मतदाताओं के रुझान ने इस मजबूत किले को भी ढहा दिया है। यह हार न सिर्फ व्यक्तिगत झटका है, बल्कि उनकी पार्टी के लिए भी एक बड़ा संदेश लेकर आई है।
वीएस बाबू कोई नए चेहरे नहीं हैं बल्कि लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने पहले DMK और AIADMK दोनों के साथ काम किया है और जमीनी स्तर पर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। हाल ही में TVK में शामिल होने के बाद उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर खुद को एक बड़े नेता के रूप में स्थापित कर लिया।
जोसेफ विजय चंद्रशेखर की पार्टी TVK इस चुनाव में तेजी से उभरती हुई ताकत बनकर सामने आई है। रुझानों में पार्टी 100 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाए हुए है जिससे यह साफ हो गया है कि अब तमिलनाडु की राजनीति में एक नई ताकत ने जगह बना ली है। इस उभार ने राज्य के पारंपरिक राजनीतिक समीकरण को बदल दिया है।
अब तक तमिलनाडु की राजनीति दो बड़ी पार्टियों के इर्द-गिर्द घूमती रही थी लेकिन TVK के आने से मुकाबला अब तीन दिशाओं में बंटता नजर आ रहा है। मतदाताओं का झुकाव बदलाव की ओर दिख रहा है जिससे आने वाले समय में राजनीति का पूरा ढांचा बदल सकता है। कोलाथुर का यह नतीजा उसी बड़े बदलाव की एक झलक है।