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Middle East Crisis को लेकर एक्शन में PM नरेंद्र मोदी, प्लास्टिक, पाइप, उर्वरक पर सरकार का Make in India प्लान

मध्य एशिया में संकट की स्थिति बरकार है। ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत जारी है। इसी बीच भारत सरकार आर्थिक मोर्च पर आने वाली सुनामी से निपटने की तैयारी में है। सप्लाई चेन न टूटे इसे लेकर बीते दिनों बड़ी बैठक हुई। पढ़ें पूरी खबर...
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May 22, 2026
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लोक सभा में पीएम नरेंद्र मोदी (photo-IANS)

मध्य एशिया में अनिश्चितता का माहौल है। बम और मिसाइलें की गूंज भले ही बंद हो गई हों, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर दुनिया भर में हाहाकार मचा हुआ है। भारत में अर्थव्यवस्था हिचकोले खाने लगी है। महंगाई दर बीते कई महीनों की तुलना में ज्यादा है। एलपीजी संकट के बाद देश में पेट्रोल और डीजल के दाम में इजाफा हुआ है। अब मोदी सरकार देश को इस संकट से निकालने की तैयारी में जुटी है।

गुरुवार को पीएम मोदी ने बुलाई मंत्री परिषद की बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने बीते गुरुवार को मंत्री परिषद की बैठक बुलाई। इस दौरान कई मुद्दों पर चर्चा हुई। पश्चिम एशिया में संकट की वजह से ऊर्जा व अन्य सेक्टर के सप्लाई चेन पर व्यापक रूप से असर पड़ा है। लिहाजा, भारत सरकर अब मेक इन इंडिया प्लान पर काम करने की तैयारी में है।

200 से ज्यादा जरूरी चीजें भारत में बनाएं

मोदी सरकार ने पेट्रोकेमिकल उद्योग को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि 200 से ज्यादा जरूरी चीजों को जल्द से जल्द भारत में ही बनाना शुरू करें। ये चीजें हर साल 50 अरब डॉलर यानी करीब 4 लाख करोड़ रुपये के आयात के बराबर हैं।

उद्योग जगत के लोगों के साथ सरकार की बैठक

DPIIT (Department for Promotion of Industry and Internal Trade) के अधिकारियों ने उद्योग जगत के लोगों के साथ बैठक की। सरकार ने कहा कि इससे निपटने के लिए आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा। सरकार व उद्योग जगत का मानना है कि पुराना स्टॉक होने के चलते देश पर अभी व्यापक असर नहीं दिख रहा है, लेकिन अगर स्थिति बिगड़ी और युद्ध दोबारा शुरू हुआ तो देशभर के कारखाने, निर्माण कार्य और रोजमर्रा की चीजों पर असर पड़ेगा।

56 अरब डॉलर का आयात

पीवीसी, पॉलीथीन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीस्टाइरीन जैसी चीजें जो पैकिंग फिल्म, प्लास्टिक कंटेनर और रोजाना इस्तेमाल की वस्तुओं के लिए जरूरी है। उन्हें देश में ही बनाने को कहा है। इसके अलावा फॉस्फोरिक एसिड, अमोनिया, एसीटिक एसिड, टोल्यूइन जैसी चीजें भी हैं जो खेती, उर्वरक, पेंट, टेक्सटाइल और मेडिकल डिवाइस बनाने में काम आती हैं। उसे भी स्वदेश में बनाया जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि कुल 56 अरब डॉलर के आयात में से ज्यादातर क्षेत्रों में भारत निर्यात तो कर ही नहीं पाता, बल्कि आयात पर पूरी तरह निर्भर है।

सिर्फ PLI स्कीम से काम नहीं चलेगा

एक्सपर्ट्स ने साफ तौर पर कहा है कि सरकार के PLI स्कीम से काम नहीं चलेगा। हर कैटेगरी के लिए अलग-अलग नीति बनानी होगी। कुछ में स्केल की कमी है। कुछ में तकनीक की समस्या है। कुछ में सप्लाई चेन की दिक्कत है।

ट्रेड एक्सपर्ट अजय श्रीवास्तव कहते हैं कि सिर्फ टैरिफ बढ़ाने या PLI स्कीम से काम नहीं चलेगा। हर कैटेगरी के लिए अलग-अलग नीति बनानी होगी। कुछ में स्केल की कमी है, कुछ में टेक्नोलॉजी, तो कुछ में सप्लाई चेन की समस्या है। खासतौर पर 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा के आयात वाले आइटम जैसे पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीकार्बोनेट और पीवीसी रेजिन सबसे ज्यादा जोखिम वाले हैं। उन्होंने कहा कि ज्यादातर चीजें FMCG पैकिंग, ई-कॉमर्स, निर्माण कार्य, ऑटोमोबाइल और खेती से जुड़ी हैं। अगर आयात प्रभावित हुआ या सप्लाई चेन टूटी तो महंगाई बढ़ेगी और उत्पादन प्रभावित होगा। सरकार अब उद्योग से उम्मीद कर रही है कि वे जल्द से जल्द प्लान बनाकर स्वदेशी उत्पादन बढ़ाएं।

Updated on:
22 May 2026 10:05 am
Published on:
22 May 2026 10:05 am