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इस बार बेवफा रहेगा मानसून! 10% कम बारिश की चेतावनी, महंगाई और जल संकट का खतरा

Monsoon Forecast 2026: वैश्विक संकट के कारण देश में बढ़ रही महंगाई के बीच इस बार मानसून सीजन की संभावित बारिश को लेकर भी चिन्ता बढ़ने वाली है। मौसम विभाग (आईएमडी) की ओर से शुक्रवार को जारी दूसरे पूर्वानुमान के अनुसार इस बार देश में दीर्घावधि औसत से 10 प्रतिशत कम बारिश होने की संभावना है। ऐसे हालात में देश में कृषि उत्पादन से लेकर पेयजल संकट तक की चुनौती उभर सकती है।

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May 30, 2026
Monsoon Forecast 2026 (AI Image)

Monsoon Forecast 2026: आईएमडी ने जून से सितंबर तक पूरे देश में कुल बारिश दीर्घावधि औसत (एलपीए) की 90 प्रतिशत रहने की संभावना जताई है। इससे पहले अप्रेल में आइएमडी ने एलपीए की 92 प्रतिशत बारिश का अनुमान लगाया था, लेकिन अब इसे और नीचे कर दिया गया है। एलपीए के आधार पर सामान्य वर्षा 87 सेमी है, यानी इस बार औसतन करीब 78 सेमी बारिश ही होने की उम्मीद है। मानसून के कमजोर रहने से बड़ा प्रभाव कोर मानसून जोन (वर्षा आधारित कृषि) वाले राज्य राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना व उत्तर कर्नाटक पर पड़ेगा। इन राज्यों में दीर्घावधि औसत की 94 प्रतिशत यानी सामान्य से 6 प्रतिशत कम बारिश होगी। इसका सीधा प्रभाव खरीफ फसलों पर पड़ेगा और कृषि से जुड़ी अर्थव्यवस्था, प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष सभी घटक कारोबार व उद्योग भी प्रभावित होंगे।

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सामान्य से ज्यादा गर्मी व लू चलेगी

आइएमडी के अनुसार जून में कई राज्यों में सामान्य से अधिक गर्मी और हीटवेव वाले दिन रहने वाले हैं। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात, आंध्र प्रदेश आदि में 5-6 हीटवेव दिन हो सकते हैं। आइएमडी ने कहा कि इससे स्वास्थ्य, पानी की उपलब्धता और बिजली की मांग पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

कम बारिश हुई तो यह पड़ेगा प्रभाव

कृषि: भारत की लगभग 50-60% खेती वर्षा पर निर्भर है। कम बारिश होने पर खरीफ फसल उत्पादन में 5-15% तक गिरावट आ सकती है।

खाद्यान्न: देश के खाद्यान्न उत्पादन (2023-24 में करीब 330 मिलियन टन के करीब) में खरीफ का हिस्सा बड़ा है। कम बारिश से कुल खाद्यान्न उत्पादन में 4 से 8 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। खाद्य सुरक्षा पर दबाव बढ़ने से आयात बढ़ाना पड़ेगा।

पेयजल व सिंचाई: देश के प्रमुख जलाशयों (166 प्रमुख बांध) में अभी 34 प्रतिशत पानी ही बचा है। बारिश कमी से भंडारण कम होगा, जिससे 2027 की गर्मियों में गांव-शहरों तक पेयजल संकट के साथ खरीफ के बाद आगामी रबी की सिंचाई भी प्रभावित होगी।

अर्थव्यवस्था: कृषि जीडीपी वृद्धि 1-2% तक कम हो सकती है। कुल जीडीपी पर 0.5-1% का नकारात्मक प्रभाव आ सकता है।

मुद्रास्फीति: खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने से आरबीआइ की मौद्रिक नीति प्रभावित हो सकती है।

किसान: आय घटने से कर्ज बढ़ना, पलायन और संकट की स्थिति बनेगी (गंभीर वर्षों में देखा गया)।

समग्र असर: ग्रामीण आय घटने से समग्र मांग प्रभावित होगी, जिसका असर एफएमसीजी, ट्रैक्टर, दोपहिया वाहन आदि पर पड़ेगा।

मानसून अभी भी केरल से 35 किलोमीटर दूर अटका

आइएमडी के अनुसार इस बार मानसून छह दिन पहले 26 मई को केरल तट से टकराने की संभावना थी। लेकिन नमी की कमी व तूफानी हवाओं के प्रभाव के चलते मानूसन केरल से 35 किलोमीटर दूर श्रीलंका के पास अटक गया है। ऐसे में अब मानसून के सामान्य तिथि 1 जून के बाद ही केरल पहुंचने की संभावना है।

क्षेत्रवार बारिश का पूर्वानुमान

क्षेत्रशामिल राज्य/केंद्रशासित प्रदेशअनुमानित वर्षा
उत्तर-पश्चिम भारतजम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंडएलपीए की 92% (सामान्य से 8% कम)
मध्य भारतमध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशाएलपीए की 94% (सामान्य से 6% कम)
दक्षिण भारतकर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरलएलपीए की 94% (सामान्य से 6% कम)
उत्तर-पूर्व भारतबिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मिजोरम, मेघालय, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंडएलपीए की 94% से 104% (सामान्य के बराबर)
कोर मानसून जोन (वर्षा आधारित कृषि वाले राज्य)राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, ओडिशा, तेलंगाना, उत्तर कर्नाटकएलपीए की 94% (सामान्य से 6% कम)
नोट: एलपीए (LPA) = दीर्घकालिक औसत वर्षा (Long Period Average)

पिछले वो साल जब सामान्य से कम हुई बारिश

वर्षसामान्य से कमीस्थिति
197919% कम बारिशगंभीर सूखा
198210-20% कम बारिशसामान्य से काफी कम वर्षा
198510-20% कम बारिशसामान्य से काफी कम वर्षा
198610-20% कम बारिशसामान्य से काफी कम वर्षा
198710-20% कम बारिशसामान्य से काफी कम वर्षा
200219% कम बारिशबहुत गंभीर सूखा
200922% कम बारिश1972 के बाद सबसे खराब सूखा
201412% कम बारिशसामान्य से कम वर्षा

तूफानी मौसम से मचा हड़कंप, 7 डिग्री तक गिरा तापमान

देश के कई राज्यों में शुक्रवार को तूफानी मौसम के साथ प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय रहीं। बीते 24 घंटों में बिहार और तमिलनाडु में कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश (11-20 सेमी) एवं पश्चिम बंगाल, सिक्किम, केरल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तेलंगाना और उत्तराखंड में भारी बारिश (7-11 सेमी) दर्ज की गई। राजधानी दिल्ली, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश, पश्चिम राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी के साथ बारिश व ओलावृष्टि दर्ज की गई। बिहार, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में थंडरस्क्वॉल ने हड़कंप मचा दिया। मौसम बदलने के साथ ही उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में चल रही भीषण गर्मी से काफी राहत मिली है। अधिकतम तापमान में 3-7 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। आईएमडी के अनुसार 31 मई तक उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और मध्य भारत में आंधी, ओलावृष्टि और भारी बारिश का अलर्ट जारी रहेगा।

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