
Meenakshi Natarajan Nomination Rejected: एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में मंगलवार को नामांकन पत्र में लंबित आपराधिक प्रकरण की जानकारी छिपाने के कारण मध्यप्रदेश में कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज कर दिया गया। इससे राज्य में चुनाव वाली सीटोंं पर भाजपा के दो उम्मीदवारों तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल के साथ तीसरे प्रत्याशी महेश केवट की जीत भी तय हो गई। अपने प्रत्याशी का नामांकन रद्द होने पर भोपाल से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस ने जबरदस्त विरोध जताया और इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया। भोपाल में कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन सदन के सामने धरना दिया तो रात को दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, सचिन पायलट, भूपेश बघेल आदि चुनाव आयोग पहुंचे। वहां किसी के नहीं मिलने पर नेताओं ने धरना दिया। आयोग ने बुधवार दोपहर कांग्रेस नेताओं को मिलने का समय दिया है।
पर्चा रद्द होने के घटनाक्रम के बीच ही कांग्रेस विधायकों के एक जत्थे को लेकर कर्नाटक जा रहा विमान एयरपोर्ट के रनवे से ही वापस लौट गया। इन विधायकों को पार्टी में भाजपा की सेंधमारी की आशंका में बेंगलूरु ले जाया जा रहा था। कांग्रेस सांसद व वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने कहा कि उन्होंने खुद नामांकन पत्रों की जांच की है और उसमें ऐसी कोई भी जानकारी छिपाई नहीं गई थी, जिसे घोषित किया जाना आवश्यक हो।
पूरा घटनाक्रम दोपहर में शुरू हुआ जब दोपहर में ही नामांकन पत्रों की जांच से पहले भाजपा महामंत्री राहुल ठाकुर ने निर्वाचन अधिकारी को शिकायत की कि 2025 में हैदराबाद की कोर्ट में दर्ज आपराधिक मुकदमे में नटराजन आरोपी नंबर-4 हैं। यह जानकारी पर्चे में छिपाई गई। निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा ने नटराजन को नोटिस जारी कर शाम छह बजे तक स्पष्टीकरण मांगा। शिकायत व नोटिस मिलते ही कांग्रेस में खलबली मच गई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार, वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, अनेक विधायक व नटराजन के वकील विधानसभा पहुंचे। वहां भाजपा विधायक पहले से मौजूद थे। दोनों पक्षों में कहासुनी व हंगामा हो गया। उधर, नटराजन ने निर्वाचन अधिकारी को नोटिस के जवाब में कहा कि कोर्ट ने सिर्फ नोटिस दिया था, कोई आपराधिक केस दर्ज नहीं है। निर्वाचन अधिकारी जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और नामांकन रद्द कर दिया।
भाजपा नेता और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, हार के डर से कांग्रेस ने षड्यंत्र किया। कांग्रेस प्रत्याशी ने जानबूझकर आपराधिक जानकारी छिपाई। यह पाप है। आपराधिक केस कोर्ट में है तो जानकारी शपथपत्र में देनी चाहिए, ताकि मतदाताओं को पता हो। चुनाव अधिकारी के सामने यह बात रखी तो उन्होंने इसे स्वीकार किया। इसी आधार पर नामांकन रद्द किया गया।
उधर, कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन ने कहा, 'जो बात पहले वोट चोरी तक सीमित थी, अब वह सीट चोरी तक पहुंच गई। पर्याप्त संख्या न होने के बाद भी भाजपा ने तीसरा प्रत्याशी उतारा। तभी से हमें समझ में आ गया था कि वे लोकतंत्र और संविधान का गला घोंटने की राजनीति कर रहे हैं। उन्हें लगा कि सदन एकजुट है तो कानूनी नोटिस का सहारा लिया। हमारे अधिवक्ताओं ने तर्क रखे, उन्हें नहीं सुना गया। हम कोर्ट जाएंगे।'
दिल्ली चुनाव आयोग के बाहर मौजूद कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा, 'हमारी उम्मीदवार (मीनाक्षी नटराजन) के खिलाफ कोई एफआईआर या चार्जशीट नहीं है। बिना किसी वजह के उनका नॉमिनेशन रद्द कर दिया है। हम यहां आए, लेकिन हमें अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है। हमने 2 घंटे पहले लिखित में जानकारी दी थी। यहां कोई हमसे मिलने को तैयार नहीं है। वे कह रहे हैं कि चुनाव आयोग में कोई अधिकारी नहीं है… ऐसा पहली बार हुआ है कि सिर्फ एक नोटिस की वजह से राज्यसभा उम्मीदवार का नॉमिनेशन रद्द कर दिया गया हो।