
Naidu Pawan Kalyan Telangana Row: आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री कोनिडेला पवन कल्याण (Konidela Pawan Kalyan) के हालिया बयान के बाद दोनों राज्यों के नेताओं के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। अब इस विवाद में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू भी खुलकर सामने आ गए हैं। नायडू ने पवन कल्याण का समर्थन करते हुए कहा कि 'राज्य विभाजन के 12 साल बाद क्षेत्रीय नफरत फैलाना उचित नहीं है। उन्होंने नेताओं को विकास और जनसेवा पर ध्यान देने की सलाह दी।' वहीं इस मुद्दे पर दोनों राज्यों की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नायडू ने कहा कि किसी भी राज्य का नेता लोकतांत्रिक व्यवस्था में कहीं भी जाकर चुनाव प्रचार कर सकता है। उन्होंने कहा कि राजनीति का उद्देश्य जनता की सेवा और विकास का होना चाहिए, न कि राज्यों के बीच तनाव पैदा करना। उन्होंने कहा कि 'तेलंगाना में पवन कल्याण के खिलाफ की गई टिप्पणियां सही तरीका नहीं हैं। ऐसे बयानों से बेवजह की समस्याएं पैदा नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, 'राज्यों के बंटवारे को अब 12 साल बीत चुके हैं। अब हम दो अलग-अलग राज्य हैं। तेलंगाना के कुछ नेता अब इन मुद्दों को उठाकर नफरत नहीं भड़का सकते। लोग जानते हैं कि किस क्षेत्र के लिए किसने क्या किया है। तेलंगाना के कुछ नेता बेवजह की टिप्पणियां कर रहे हैं।'
इस पूरे विवाद की शुरुआत पवन कल्याण की उस टिप्पणी से हुई, जिसमें उन्होंने कुछ नेताओं द्वारा कथित रूप से हैदराबाद आने से रोकने की चेतावनी पर नाराजगी जताई थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, 'कुछ नेता कह रहे हैं कि मैं हैदराबाद में कैसे प्रवेश करूंगा। क्या तेलंगाना तुम्हारे बाप की जगह है? तुम मुझे धमकी देने वाले कौन होते हो?' उन्होंने साल 2014 में हुए राज्य विभाजन के तरीके पर भी असंतोष जताते हुए कहा, 'हमारी शिकायत यह है कि राज्य का विभाजन गरिमापूर्ण ढंग से नहीं किया गया और तेलंगाना राज्य ठीक से नहीं दिया गया।'
पवन कल्याण के बयान पर BRS के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (KTR) ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'एक बात जो पवन कल्याण को जरूर याद रखनी चाहिए… इसमें कोई शक नहीं कि तेलंगाना यहां की धरती के इन बेटों और यहां रहने वाले 4 करोड़ लोगों की जागीर है। यहां रहने, आने और बसने के लिए आपका हमेशा स्वागत है। आपके परिवार यहां हैं, आपके कारोबार यहां हैं… यहीं रहिए, आपको कौन रोक रहा है? पिछले 10 या 12 सालों में क्या कहीं कोई छोटी-मोटी भी दिक्कत आई है? भले ही हम इलाकों के तौर पर अलग हो गए, लेकिन लोगों के तौर पर हम हमेशा एक साथ रहना चाहते थे।'
नायडू ने कहा कि वह हाल ही में तमिलनाडु में चुनाव प्रचार कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि देशभर के नेता विभिन्न राज्यों में जाकर चुनाव प्रचार करते हैं और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि 'कर्नाटक के नेता भी दूसरे राज्यों में प्रचार के लिए जाते हैं। साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने खुद को राष्ट्रीय पार्टी घोषित किया था और आंध्र प्रदेश में भी विस्तार की बात कही थी। ऐसे में दूसरे राज्यों में राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल उठाना उचित नहीं है।'
नायडू ने कहा कि तेलुगु समुदाय के लोग दुनिया के कई देशों में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर रहे हैं। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देशों में भी तेलुगु मूल के लोग नेतृत्वकारी भूमिकाओं में हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में नेतृत्व सेवा और काम के आधार पर मिलता है। नेताओं को विकास और जनहित के मुद्दों पर प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए, न कि क्षेत्रीय पहचान के आधार पर राजनीति करनी चाहिए।
पवन कल्याण, KTR और अब चंद्रबाबू नायडू के बयानों के बाद यह मुद्दा दोनों तेलुगु राज्यों की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है। हालांकि नायडू ने साफ संकेत दिया है कि भविष्य की राजनीति विकास, जनसेवा और सहयोग पर आधारित होनी चाहिए, न कि पुराने क्षेत्रीय विवादों को दोबारा हवा देने पर।