Naxalism: छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पित नक्सलियों की जिंदगी बदल रही है। रिवर्स वासेक्टॉमी अभियान से 73 पूर्व नक्सलियों को दोबारा पिता बनने की उम्मीद मिली है। सामूहिक विवाह समारोहों के जरिए वे समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं, जहां बंदूक की जगह अब सिंदूर, परिवार और नई जिंदगी के सपने ने ले ली है।

Naxalism in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समाप्ति के बाद आम लोग ही नहीं, खुद आत्म समर्पित नक्सलियों का जीवन भी बदल रहा है। बरसों सामाजिक प्राणी बनने के बजाय जंगलों की खाक छानते बंदूक-एनकाउंटर के साये में जी रहे ये नक्सली आत्मसमर्पण के बाद अब समाज की मुख्यधारा में लौटे तो उनका परिवार भी बस रहा है, और पिता बनने की हसरत भी पूरी हो रही है। शासन ने मानवीय पहल के तहत नक्सली संगठन में सक्रिय रहने के दौरान जबरन नसबंदी (वासेक्टॉमी) का शिकार हुए पुरुषों को दोबारा पितृत्व सुख दिलाने के लिए विशेष 'रिवर्स वासेक्टॉमी' अभियान शुरू किया है। ढाई महीने में 73 आत्मसमर्पित नक्सलियों की यह सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी है। बीते दिनों एक विवाह सम्मेलन में पहली बार सामाजिक और धार्मिक रीति-रिवाजों से दो आत्मसमर्पित नक्सली जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। प्रशासन अन्य नक्सली जोड़ों के भी सामूहिक विवाह की तैयारी कर रहा है। अब पूर्व नक्सली महिला के माथे पर गोली नहीं सिंदूर है तो पुरुष की गोद में आइईडी नहीं अपने लाडले की उम्मीद है।
जगदलपुर के महारानी अस्पताल में जिला प्रशासन, पुलिस और यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में नि:शुल्क 'रिवर्स वासेक्टॉमी रीकैनालाइजेशन' सर्जिकल कैंप आयोजित किए गए। शिविरों में मुंबई, रायपुर के शीर्ष यूरोलॉजिस्ट और माइक्रोसर्जरी विशेषज्ञों ने अपनी सेवाएं दीं। यूरोलॉजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. राजेश कुकरेजा ने बताया कि पहले चरण में 33 और दूसरे चरण में 40 सफल सर्जरियां की गईं। डॉ. कुकरेजा के अनुसार, रिवर्स वासेक्टॉमी दुनिया की सबसे जटिल माइक्रोसर्जरी प्रक्रियाओं में से एक है, जिसमें नसबंदी के दौरान काटी गई सूक्ष्म शुक्रवाहिकाओं को दोबारा जोड़ा जाता है।
पहले भी पूर्व नक्सलियों के ऐसे ऑपरेशन किए गए लेकिन अब संख्या अधिक होने से शिविर लगाए जा रहे हैं। एसपी शलभ सिन्हा एक साल पहले रिवर्स वासेक्टॉमी का लाभ लेने वाला एक आत्मसमर्पित नक्सली हाल ही दो माह की बच्ची का पिता बना है।
जगदलपुर के टाउन हॉल में बीते दिनों मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह समारोह में 17 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे जिनमें दो जोड़े आत्मसमर्पित पूर्व नक्सलियों के थे। जिन हाथों में कभी बंदूक थी उन हाथों से पत्नी की मांग भरी। उन्होंंने सामाजिक और धार्मिक रीति-रिवाज के साथ वैवाहिक जीवन की शुरुआत की। बड़ी संख्या में अन्य समर्पित युवा नक्सली भी शादी करना चाहते हैं। प्रशासन जोड़ों के आवेदन पर शादी का इंतजाम करता है।
वट्टीराम सोढ़ी, पूर्व नक्सली ने कहा कि पहले जीवन में केवल संघर्ष था, भविष्य धुंधला था। आज शादी के बाद मेरे पास परिवार बसाने, सम्मानजनक रोजगार करने और सिर उठाकर जीने के सपने हैं। इन्होंने 2025 में आत्मसमर्पण किया था।
सुंदरराज पी., आईजी, बस्तर रेंज ने बताया कि यह पहल मुख्यधारा में लौटे लोगों को सम्मानजनक और सामान्य सामाजिक जीवन देने का एक दृढ़ प्रयास है। ऐसे अभियानों के सकारात्मक परिणाम मिले हैं। कई परिवारों के घरों में बच्चों की किलकारियां गूंजी हैं और आगे भी उन्हें खुशी मिलने वाली है।
महिला-पुरुष कैडर वाले नक्सली संगठनों में कड़े अनुशासन के चलते प्रेम, शादी पर प्रतिबंध था। ऐसा करने का प्रयास करने पर मौत की सजा तक मिलती थी। संगठनों ने पुरुष कैडर की जबरन नसबंदियां तक करवाई थी।