NCSC Notice: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने ममता बनर्जी के बयान को आपत्तिजनक बताते हुए संज्ञान लिया है और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव व डीजीपी को तीन दिन में जवाब देने का नोटिस जारी किया है।
Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ स्वतः संज्ञान लिया है। यह मामला एक वायरल वीडियो से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि उन्होंने चुनावी सभा के दौरान अनुसूचित जाति समुदाय के लिए आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया।
यह वीडियो 26 अप्रैल को कोलकाता के चौरंगी इलाके में आयोजित एक रैली का बताया जा रहा है, जिसे एक टीवी चैनल पर प्रसारित किया गया था। उस समय पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का माहौल था और राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं।
NCSC ने इस मामले को गंभीर मानते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी किया है। आयोग ने तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय में जवाब नहीं मिलता है, तो वह संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन भी जारी कर सकता है।
आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने कहा कि चुनावी रैली में दिए गए इस बयान में अनुसूचित जाति समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जो असंवैधानिक होने के साथ-साथ एससी समुदाय की भावनाओं के भी खिलाफ है। साथ ही आयोग अनुसूचित जाति के संवैधानिक अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
इस विवाद पर BJP ने भी कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे गंभीर और आपत्तिजनक बताया। BJP ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस एक तरफ वंचित और पिछड़े वर्गों की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ उन्हीं समुदायों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करती है।
यह पूरा मामला अब पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। वीडियो सामने आने के बाद जहां एक ओर जांच की प्रक्रिया तेज हो गई है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी भी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद राज्य की चुनावी राजनीति को और प्रभावित कर सकता है।