BJP 2029 Election Strategy: लोकसभा में विपक्षी दलों के सांसदों के एनडीए के समर्थन में आने की अटकलों के बीच परिसीमन बिल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। टीएमसी, शिवसेना (यूबीटी) और डीएमके के संभावित समर्थन से सदन का समीकरण बदल सकता है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा अभी भी चुनौती बना हुआ है।

Delimitation Bill: देश की राजनीति में इस समय विपक्षी पार्टियां लगातार टूट रही है। विधानसभा चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस टूट गई है। विधानसभा के बाद अब लोकसभा में भी पार्टी से बागी होकर 20 सांसदों ने एनसीपीआई में विलय कर लिया है और मोदी सरकार का समर्थन करने का ऐलान कर दिया है। अब महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के टूटने की खबर सामने आई है।
पार्टी के 9 में से 6 सांसद उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ सकते है और एकनाथ शिंदे के गुट में जा सकते है। एकनाथ शिंदे की शिवसेना एनडीए की सहयोगी है। ऐसे में इन सांसदों का समर्थन से सदन में एनडीए की संख्या बढ़ जाएगी।
भले ही लोकसभा में NDA की ताकत बढ़ जाए लेकिन फिर भी दो-तिहाई बहुमत से काफी दूर होगी। दरअसल, 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार परिसीमन बिल लाना चाहती है। इस बिल को पहले भी सदन में ला चुकी है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत नहीं होने के कारण यह बिल वापस चला गया।
अब लगातार विपक्षी पार्टियों के सांसदों का एनडीए को समर्थन देने से एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई है कि सरकार दोबारा सदन में इस बिल को लाना चाहती है। दरअसल, लोकसभा चुनाव 2029 से पहले परिसीमन बीजेपी का सबसे बड़ा एजेंडा है।
एनडीए के पास वर्तमान में 293 सीटे हैं। दो-तिहाई बहुमत से 69 सीटें कम है। इसके लिए अब विपक्षी सांसदों को मिलने का सिलसिला शुरू हो गया है। टीएमसी के 20 सांसदों ने एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया है। इसके बाद सदन में इसकी संख्या 313 हो गई है।
दरअसल, टीएमसी के सांसदों के विलय के बाद अब बीजेपी की नजर दो पार्टियों- उद्धव ठाकरे की शिवसेना और स्टालिन की डीएमके पर टिकी हुई है। इसके लिए तैयारी भी हो गई है। महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे एक ऑपरेशन चला रहे है, जिसे नाम ऑपरेशन टाइगर दिया है। इसके तहत उद्धव गुट के सांसदों को अपनी तरफ करना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी के 9 में से 6 सांसद शिंदे के संपर्क में बताए जा रहे है।
तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके ने साथ चुनाव लड़ा था, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। एक्टर विजय की पार्टी टीवीके ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन बहुमत से दूर रही। इसके बाद कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़ टीवीके का समर्थन कर दिया। इसके बाद डीएमके और कांग्रेस के बीच दूरी बढ़ गई और डीएमके इंडिया गठबंधन से अलग हो गई।
अटकलें लगाई जा रही है कि डीएमके अब सदन में एनडीए का साथ दे सकती है। लोकसभा में डीएमके के 22 सांसद है। यदि डीएमके सदन में साथ देती है तो एनडीए के सांसदों की संख्या बढ़ जाएगी।
यदि टीएमसी, शिवसेना उद्धव और डीएमके के सांसद एनडीए के साथ देते है तो सदन में कुल सांसदों की संख्या 341 हो जाएगी। जिसमें एनडीए के 293, टीएमसी के 20, उद्धव के 6 और डीएमके के 22 सांसद शामिल है। अभी भी दो तिहाई बहुमत से 21 सीटें कम होगी।
इसके बाद अब मोदी सरकार अन्य विपक्षी दलों के सांसदों को तोड़ सकती है। जिसमे कांग्रेस के बाद सबसे ज्यादा सपा के सांसद है। बीजेपी की नजर अब आम आदमी पार्टी और सपा पर जा सकती है। लेकिन सपा के सांसदों को तोड़ना बीजेपी के लिए मुश्किल होगा, क्योंकि पार्टी पर अखिलेश यादव की पकड़ मजबूत मानी जाती है और यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव भी होने है।
हालांकि अब छोटे विपक्षी दलों के सांसदों को तोड़कर एनडीए 362 का आंकड़ा छू सकती है। लेकिन यह मुश्किल है, क्योंकि इसके लिए कई छोटे दलों के सांसदों को तोड़ना होगा और अपनी ओर करना होगा।
यदि सदन में एनडीए के पास दो तिहाई बहुमत नहीं होगा तो परिसीमन बिल पास नहीं होगा। दो-तिहाई बहुमत के लिए मोदी सरकार अन्य दलों से समर्थन मांग सकती है।