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NDA Lok Sabha Strength: मानसून सत्र से पहले NDA और मजबूत, विपक्षी दलों के बागियों से 320 के पार पहुंचा आंकड़ा

NDA Majority in Parliament: संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले अचानक बदले समीकरणों ने इंडिया गठबंधन के होश उड़ा दिए हैं। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में मची इस बड़ी भगदड़ ने न केवल सत्तापक्ष का पलड़ा भारी किया है, बल्कि देश के विधायी इतिहास में दलबदल कानून के नए आयाम भी खोल दिए हैं।
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Parliament's Monsoon Session
Parliament's Monsoon Session : मानसून सत्र से पहले संसद का नया गणित, NDA के पक्ष में बदले समीकरण (फोटो सोर्स:@LokSabhaSectt)

Monsoon Session 2026: देश की सियासत में पासा कितनी तेजी से पलटता है, इसका जीवंत उदाहरण संसद के आगामी मानसून सत्र से ठीक पहले देखने को मिल रहा है। कुछ महीने पहले तक जिस विपक्ष को एकजुट और हमलावर माना जा रहा था, वह आज अपने ही अंतर्विरोधों के बोझ तले दबता नजर आ रहा है। राजनीतिक गलियारों से आ रही सबसे बड़ी खबर यह है कि लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का कुनबा अब 320 सांसदों के जादुई आंकड़े को पार करने जा रहा है। बजट सत्र के दौरान 295 के आंकड़े पर सिमटने वाला सत्ताधारी खेमा अब विपक्ष की सेंधमारी के बाद प्रचंड बहुमत के नए शिखर पर खड़ा है।

इस अभूतपूर्व उलटफेर की पटकथा मुख्य रूप से दो राज्यों पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में लिखी गई है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के हालिया प्रशासनिक एवं विधायी फैसले ने विपक्षी खेमे की रीढ़ तोड़ कर रख दी है। इस पूरे सियासी ड्रामे में सबसे बड़ा झटका पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लगा है, जिनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 सांसदों ने बगावत का झंडा बुलंद करते हुए एनडीए का दामन थाम लिया है।

सुदीप बंद्योपाध्याय की पीएम मोदी से सीक्रेट मुलाकात और नया 'NCPI' फ्रंट

इस सियासी भूचाल की शुरुआत तब हुई जब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठतम नेताओं में शुमार सुदीप बंद्योपाध्याय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक शिष्टाचार मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में ही बागियों के भविष्य का खाका तैयार कर लिया गया था, जहां प्रधानमंत्री ने खुद इन सांसदों का एनडीए परिवार में स्वागत किया।

इस रणनीतिक मुलाकात के तुरंत बाद, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा सर्वदलीय बैठक के लिए भेजे गए एक आधिकारिक आमंत्रण पत्र ने इस गुप्त समझौते पर मुहर लगा दी। पत्र में सुदीप बंद्योपाध्याय को एक नई पार्टी 'नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) के सदस्य के रूप में संबोधित किया गया है।

हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस नई पार्टी के औपचारिक विलय पर तकनीकी रूप से अंतिम निर्णय अभी सुरक्षित रखा है, लेकिन उन्होंने बागी गुट को सदन में एनडीए के ब्लॉक के साथ बैठने के लिए अलग सीटें आवंटित कर दी हैं। इसका सीधा और व्यावहारिक अर्थ यह है कि मानसून सत्र के दौरान पेश होने वाले सभी महत्वपूर्ण विधेयकों, बजट संशोधनों और अन्य विधायी प्रस्तावों पर ये 20 सांसद पूरी तरह से सरकार के पक्ष में मतदान करेंगे।

इस पर तल्ख प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने इसे लोकतंत्र की विडंबना बताया और कहा कि एक तरफ रिकॉर्ड में इन्हें टीएमसी का माना जा रहा है, तो दूसरी तरफ सरकार इन्हें नई पार्टी के रूप में सर्वदलीय बैठक में बुला रही है।

महाराष्ट्र में उद्धव को एक और झटका, शिंदे गुट में शामिल हुए 6 सांसद

दूसरी तरफ, महाराष्ट्र की राजनीति में भी उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को करारा झटका लगा है। उद्धव गुट ने लोकसभा अध्यक्ष से गुहार लगाई थी कि संसदीय दल के दो-तिहाई सदस्यों का अलग होना तब तक मान्य नहीं होना चाहिए जब तक कि मुख्य संगठन का आधिकारिक विलय न हो। लेकिन अध्यक्ष ओम बिरला ने स्थापित कानूनी नज़ीरों का पालन करते हुए फैसला सुनाया कि यदि विधायी दल के दो-तिहाई सदस्य (इस मामले में 6 बागी सांसद) स्वेच्छा से अलग होना चाहते हैं, तो उन्हें दलबदल विरोधी कानून (दसवीं अनुसूची) के तहत अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। इसके साथ ही इन 6 सांसदों को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली असली शिवसेना का हिस्सा मान लिया गया है, जो पहले से ही एनडीए की एक मजबूत धुरी है।

दलबदल कानून और पहले के ऐतिहासिक घटनाक्रम

संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law): 1985 में 52वें संविधान संशोधन के जरिए इसे भारतीय संविधान में जोड़ा गया था। इसके तहत यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई (2/3) विधायक या सांसद एक साथ टूटते हैं, तो उनकी सदन की सदस्यता रद्द नहीं होती और वे नया गुट बना सकते हैं या किसी अन्य दल में विलय कर सकते हैं।

2019 का तेलुगु देशम पार्टी (TDP) प्रकरण: जून 2019 में टीडीपी के 4 राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल हो गए थे, क्योंकि वे राज्यसभा में टीडीपी के कुल 6 सांसदों का दो-तिहाई हिस्सा थे। उसे भी सभापति द्वारा वैध माना गया था।

2022 का महाराष्ट्र शिवसेना संकट: एकनाथ शिंदे ने जून 2022 में शिवसेना के 55 में से 40 विधायकों के साथ बगावत की थी, जिसे बाद में चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट की व्याख्याओं के आधार पर असली शिवसेना के रूप में मान्यता मिली। वर्तमान लोकसभा का यह घटनाक्रम उसी सिलसिले की अगली कड़ी है।

बजट सत्र से अब तक: कैसे बदला सत्ता का अंकगणित?

इस पूरे बदलाव के बाद सदन के भीतर का गणित पूरी तरह बदल गया है। बजट सत्र की शुरुआत में जहां भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगियों के पास कुल मिलाकर 295 सीटें थीं, वहीं अब टीएमसी के 20 और शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों के प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष समर्थन से यह संख्या 321 तक पहुंच गई है। विपक्षी गठबंधन 'INDIA' के लिए यह एक बहुत बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका है, क्योंकि अब वे सरकार को संख्या बल के आधार पर घेरने की स्थिति में नहीं रह गए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष के भीतर आंतरिक कलह, नेतृत्व का अभाव और क्षेत्रीय क्षत्रपों की अपनी महत्वाकांक्षाएं इस बिखराव की मुख्य वजह हैं। आगामी मानसून सत्र में जब वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक, एक देश-एक चुनाव और समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा होगी, तब एनडीए का यह बढ़ा हुआ संख्या बल सरकार को बिना किसी अड़चन के बड़े फैसले लेने की असीमित शक्ति प्रदान करेगा। विपक्ष के लिए अब आत्ममंथन का समय है, क्योंकि यदि यह बिखराव जारी रहा तो संसद के भीतर सरकार को चुनौती देने वाली हर आवाज कमजोर होती जाएगी।

Updated on:
19 Jul 2026 12:39 pm
Published on:
19 Jul 2026 12:39 pm
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