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मानसून सत्र से पहले सियासी घमासान, NCPI को बुलाने पर विपक्ष का सर्वदलीय बैठक से वॉकआउट

All-Party Meeting Opposition Walkout: विपक्ष का आरोप है कि टीएमसी के 20 बागी सांसदों को NCPI के नाम से अलग समूह मानकर बैठक में बुलाया गया, जबकि इस समूह को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की मान्यता नहीं मिली है।
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भारत

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Ashib Khan

Jul 19, 2026

Opposition boycott all-party meeting India

सर्वदलीय बैठक से विपक्षी दलों ने किया वॉकआउट (Photo-ANI)

Parliament Monsoon Session 2026: संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होगा। इससे पहले रविवार को सियासी हलचल तेज हो गई है। सत्र से पहले मोदी सरकार ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक से विपक्षी दलों ने कुछ ही मिनटों बाद वॉकआउट कर दिया। इससे सरकार और विपक्ष के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया। 

दरअसल, टीएमसी के बागी नेताओं की नई पार्टी NCPI को भी इस बैठक में बुलाया था। जिसका विपक्षी दलों ने विरोध किया था। हालांकि विपक्षी दलों ने इसे प्रतीकात्मक विरोध बताया। विपक्ष का आरोप है कि टीएमसी के 20 बागी सांसदों को 

NCPI के नाम से अलग समूह मानकर बैठक में बुलाया गया, जबकि इस समूह को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की मान्यता नहीं मिली है।

बैठक से बाहर आने के बाद टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि आज कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दलों और शिवसेना (UBT) सहित पूरे विपक्ष ने इस मुद्दे के विरोध में बैठक का बहिष्कार किया।

महुआ मोइत्रा ने कहा कि संसद की टेबल ऑफिस द्वारा जारी सूची में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के 28 सांसद ही दर्शाए गए हैं। ऐसे में जिन 20 बागी सांसदों को अलग समूह बताकर बुलाया गया है, उनके विलय को अब तक लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है और उनकी अयोग्यता से जुड़ी 20 याचिकाएं भी लंबित हैं।

वहीं बैठक को लेकर कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने कहा कि कई मुद्दे हैं। अयोध्या में हुई चोरी सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है और NEET परीक्षा का मुद्दा भी है। लोगों से जुड़े हर मुद्दे हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

टीएमसी के बागी सांसद ने क्या कहा? 

टीएमसी के बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि हमें बैठक का निमंत्रण मिला था और हमने इसमें भाग लिया। हमने 20 सांसदों वाली अपनी नई पार्टी का प्रतिनिधित्व किया।

उन्होंने कहा कि हमारा स्पष्ट रुख है कि सदन विपक्ष का भी है, और इस बात को स्वीकार किया जाना चाहिए। सरकार को भी इस बात पर सहमत होना चाहिए और सदन को सुचारु रूप से चलाने के लिए पहल करनी चाहिए।

सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि इसके अलावा, हम अपनी पार्टी के मूल सिद्धांतों—धर्मनिरपेक्षता, सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता—के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। ये सिद्धांत एनसीपीआई (NCPI) के संविधान में स्पष्ट रूप से शामिल हैं। हमारा मानना है कि यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एनसीपीआई का गठन करने वाले 20 सांसदों में से तीन मुस्लिम हैं।