
(फोटो सोर्स YusufJamee एक्स यूजर स्क्रीनशॉटन)
Ladakh Chemical Fertilizer Ban: लद्दाख ने खेती के क्षेत्र में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने रासायनिक और कृत्रिम खादों के इस्तेमाल, बिक्री और प्रचार पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। अब यहां किसान सिर्फ जैविक खाद और प्राकृतिक तरीकों से खेती को बढ़ावा देंगे।
इस फैसले के साथ लद्दाख भारत के सबसे बड़े प्रमाणित जैविक खेती वाले क्षेत्रों में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रशासन का लक्ष्य लद्दाख को पूरी तरह जैविक क्षेत्र बनाना है। साथ ही हिमालयी पर्यावरण, मिट्टी और जल स्रोतों की सुरक्षा करना भी इस कदम का अहम उद्देश्य है।
लद्दाख प्रशासन के नए आदेश के बाद पूरे केंद्र शासित प्रदेश में रासायनिक और कृत्रिम खादों को लाने, बेचने, बांटने और इस्तेमाल करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
अगर कोई व्यक्ति इस नियम का उल्लंघन करता है तो उस पर कम से कम 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। प्रशासन ने किसानों और कृषि से जुड़े संगठनों को सलाह दी है कि वे खेती में केवल जैविक खादों और प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करें। यह फैसला लद्दाख के नाजुक पर्यावरण को बचाने के लिए लिया गया है। रासायनिक खादों के कम इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी और पानी के स्रोत भी सुरक्षित रहेंगे।
लद्दाख को जैविक क्षेत्र बनाने का यह फैसला उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के निर्देशों के बाद लागू किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से जैविक फसलों की पहचान मजबूत होगी और किसानों को बेहतर बाजार मिलने में मदद मिलेगी।
लद्दाख में जैविक खेती को बढ़ावा देने का काम पहले से जारी है। यहां के मौसम और पारंपरिक खेती के तरीकों को देखते हुए यह क्षेत्र जैविक खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है।
अब तक लद्दाख के 207 गांवों को जैविक प्रमाणीकरण के दायरे में लाया जा चुका है। प्रशासन का लक्ष्य आने वाले समय में पूरे क्षेत्र को प्रमाणित जैविक प्रदेश के रूप में विकसित करना है।
कृषि विभाग को इस अभियान को लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा बागवानी, सहकारिता, ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग किसानों की मदद करेंगे। इन विभागों की ओर से जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और जैविक खादों की उपलब्धता बढ़ाने पर भी काम किया जाएगा।
प्रशासन का मानना है कि यह कदम लद्दाख को पर्यावरण के अनुकूल खेती का एक बड़ा उदाहरण बना सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ाने, जैव विविधता बचाने और हिमालयी क्षेत्र को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। आने वाले समय में लद्दाख टिकाऊ और प्राकृतिक खेती के वैश्विक मॉडल के रूप में पहचान बना सकता है।
Updated on:
19 Jul 2026 07:07 pm
Published on:
19 Jul 2026 07:07 pm
