
NEET UG Re-Exam 2026: नीट यूजी री-एग्जाम को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। 21 जून को होने वाली परीक्षा को लेकर सख्त सुरक्षा नियम और दिशानिर्देश फॉलो किए जाएंगे। परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र-छात्राओं को ध्यान में रखते हुए स्पेशल ट्रेनें और बसें चलाने का फैसला किया गया है। इस बार पहले से ज्यादा सख्त सुरक्षा बरती जा रही है। परीक्षा को लेकर प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की टीम बनाई गई है। टीम के नेतृत्व में तैनात अधिकारी और कर्मचारी हर सेंटर की निगरानी रखेंगे। सीसीटीवी से भी निगरानी रखी जाएगी।
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने 21 जून को होने वाले NEET UG 2026 के दोबारा एग्जाम से पहले सभी मेडिकल कॉलेजों के लिए एडवाइजरी जारी की है। एनएमसी ने कॉलेजों को निर्देश दिया गया है कि वे सतर्क रहें, छात्रों को गलत तरीकों के खिलाफ सलाह दें। इसके साथ ही कहा कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए खास मामलों को छोड़कर 20-21 जून को छुट्टी नहीं दें।
राजस्थान के भीलवाड़ा में फर्जी पेपर बेचने के आरोप में एक छात्र को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया के जरिए री-नीट का कथित पेपर बेच रहा था और अभ्यर्थियों से हजारों रुपये वसूल रहा था। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी 19 वर्षीय आकाश चौधरी है। वह सोशल मीडिया के जरिए छात्रों को चार-चार हजार रुपये मे फर्जी पेपर बेच रहा था। बताया जा रहा है कि वह छात्रों से क्यूआर कोड भेजकर अपने खाते में पैसे डलवा रहा था। फिलहाल पुलिस उसके बैंक खातों, ऑनलाइन नेटवर्क और ठगी के शिकार लोगों की जानकारी जुटा रही है।
नीट परीक्षा को लेकर अभ्यर्थी काफी तनाव में है। परीक्षा रद्द से अब तक कई छात्रों ने सुसाइड कर लिया है। परीक्षा के दो दिन पहले मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में नीट की तैयारी कर एक छात्र ने सुसाइड कर लिया। गुरुवार देर रात को अवंतिका मौर्य धाकड़ तीसरी मंजिल से कूद गई। इसके बाद गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुक्रवार सुबह उसकी मौत हो गई है। अवंतिका की बहन सपना ने बताया कि 3 बार नीट का एक्जाम पास नहीं कर पाई थी। बीते माह परीक्षा रद्द होने के बाद से वह काफी तनाव में थी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने नीट पुनर्परीक्षा के दौरान केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को सही ठहराया है। कोर्ट ने शुक्रवार को कंपनी की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि मामले की आपात स्थिति को देखते हुए सरकार की ओर से उठाया गया कदम उचित था। जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने कहा कि सरकार ने प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने के लिए पर्याप्त कारण दर्ज किए थे। आदेश में किसी प्रकार की प्रक्रियागत अनियमितता या सोच-विचार की कमी नहीं है। कोर्ट ने माना कि मूल ब्लॉकिंग आदेश और बाद में समीक्षा समिति द्वारा लिया गया फैसला दोनों ही पर्याप्त कारणों पर आधारित थे।