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नेपाल में 5 मार्च को महासंग्राम! पड़ोसी देश के चुनाव से भारत की विदेश नीति पर क्या असर पड़ेगा ? जानिए

Nepal Politics:नेपाल में होने वाले आगामी चुनाव केवल वहां की सत्ता का बदलाव नहीं हैं, बल्कि भारत-नेपाल के भू-राजनीतिक संबंधों की नई दिशा भी तय करेंगे। इन चुनावों के परिणाम का सीधा असर दोनों देशों की सीमा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और व्यापारिक साझेदारी पर पड़ेगा।

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Feb 27, 2026
नेपाल चुनाव 2026 का भारत पर असर। (सांकेतिक फोटो: AI)

India-Nepal Relations : भारत से सटे देश नेपाल में 5 मार्च को होने जा रहे चुनाव (nepal elections) केवल उस देश के आंतरिक मामलों तक सीमित नहीं हैं। पड़ोसी देश होने के नाते इस चुनाव (nepal elections 2026) के परिणाम का सीधा असर भारत पर भी पड़ेगा। काठमांडू की सत्ता में कौन बैठेगा, यह तय करेगा कि आने वाले समय में भारत-नेपाल संबंध (India-Nepal Relations) किस दिशा में आगे बढ़ेंगे। भारत के लिए नेपाल केवल एक पड़ोसी नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच 'रोटी-बेटी' का पुराना नाता है।

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खुली सीमा और सुरक्षा की चिंता (Nepal election 5 March analysis )

भारत और नेपाल के बीच 1,850 किलोमीटर से अधिक लंबी खुली सीमा है। नेपाल में राजनीतिक स्थिरता भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। अगर नेपाल में एक मजबूत और भारत-समर्थक सरकार बनती है, तो सीमा पार से होने वाली तस्करी, जाली नोटों के कारोबार और घुसपैठ जैसी समस्याओं पर लगाम लगाना आसान हो जाता है। इसके विपरीत, राजनीतिक अस्थिरता का फायदा भारत विरोधी ताकतें उठा सकती हैं।

चीन का बढ़ता प्रभाव (The China Factor)

पिछले कुछ वर्षों में नेपाल की राजनीति में चीन की दखलंदाजी तेजी से बढ़ी है। बीजिंग लगातार बुनियादी ढांचे और निवेश के जरिए काठमांडू को लुभाने की कोशिश कर रहा है। नेपाल के चुनावों में अक्सर वामपंथी गठबंधन (जिनका झुकाव कभी-कभी चीन की तरफ होता है) और लोकतांत्रिक ताकतों (जो भारत के करीब माने जाते हैं) के बीच कड़ी टक्कर होती है। नई दिल्ली की नजर इस बात पर है कि चुनाव जीतकर आने वाली नई सरकार का कूटनीतिक झुकाव किस तरफ होगा।

व्यापार और आर्थिक साझेदारी

नेपाल अपनी अर्थव्यवस्था, रसद और व्यापार के लिए काफी हद तक भारत पर निर्भर है। दोनों देशों के बीच कई पनबिजली (Hydropower) परियोजनाएं और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट चल रहे हैं। भारत चाहेगा कि नई सरकार इन प्रोजेक्ट्स को बिना किसी राजनीतिक रुकावट के आगे बढ़ाए। एक स्थिर नेपाल न केवल दक्षिण एशिया की शांति के लिए बल्कि भारत के आर्थिक हितों के लिए भी फायदेमंद है। कुल मिलाकर, 5 मार्च का दिन तय करेगा कि नेपाल किस राजनीतिक विचारधारा को चुनता है। भारत इस पूरी चुनाव प्रक्रिया का बारीकी से आकलन कर रहा है ताकि नतीजों के बाद नई सरकार के साथ कूटनीतिक तालमेल तुरंत बिठाया जा सके।

इस चुनाव के कुछ अहम पहलू

  • अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल के मतदाता इस बार विकास और स्थिरता को वोट देंगे। भारत सरकार के सूत्रों का कहना है कि नई दिल्ली नेपाल की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करती है और हर चुनी हुई सरकार के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।
  • चुनाव के नतीजे आने के बाद, नेपाल के नए प्रधानमंत्री की पहली विदेश यात्रा (क्या वह भारत आएंगे या चीन जाएंगे?) और उनके शुरुआती कूटनीतिक बयानों पर नजर रखी जाएगी।
  • नेपाल के युवा वोटर्स का बढ़ता प्रभाव। इस बार पारंपरिक पार्टियों से अलग, नए युवा नेता और निर्दलीय उम्मीदवार भी कड़ी टक्कर दे रहे हैं, जो भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं।
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