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नीति आयोग रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: 98,592 स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं, 1,04,125 स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक

NITI Aayog Report: भारत जीडीपी का 4.6 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करता है। लेकिन 1.19 लाख स्कूलों में बिजली नहीं है। सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में से केवल 51.7 प्रतिशत में ही विज्ञान प्रयोगशालाएं हैं।

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May 09, 2026
नीति आयोग रिपोर्ट में बड़ा खुलासा (इमेज सोर्स: पत्रिका)

NITI Aayog Report Latest Update: नीति आयोग की रिपोर्ट में देश के सरकारी स्कूलों की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। इसके मुताबिक देश में हजारों स्कूल बिना पानी, बिजली, शौचालय, लैब और शिक्षकों के चल रहे हैं और कुछ स्कूलों में तो छात्र तक नहीं हैं। ‘भारत में शिक्षा प्रणाली’ शीर्षक से जारी आयोग की रिपोर्ट में स्कूली बुनियादी ढांचे, कर्मचारियों की संख्या, नामांकन और सीखने के संकेतकों पर राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय आंकड़े जुटाए गए हैं। स्कूलों में सुविधाओं की कमी और शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट से सरकारी स्कूलों में नामांकन तेजी से कम हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक साल 2005 में जहां 71 प्रतिशत छात्र सरकारी स्कूलों में पढ़ते थे, वहीं वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा गिरकर मात्र 49.24 प्रतिशत रह गया है। इसके विपरीत, अब माध्यमिक शिक्षा के स्तर पर 44.01 प्रतिशत संस्थान प्राइवेट स्कूलों के रूप में संचालित हो रहे हैं। रिपोर्ट में शौचालयों की समग्र उपलब्धता का प्रतिशत तो ठीक है, लेकिन 98,592 स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय चालू हालात में नहीं हैं, जबकि 61,540 स्कूलों में उपयोग योग्य शौचालय नहीं है। लगभग 14,505 स्कूलों में पानी की सुविधा नहीं है। वहीं, 59,829 स्कूलों में हाथ धोने की सुविधा भी नहीं है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में से केवल 51.7 प्रतिशत में ही विज्ञान प्रयोगशालाएं हैं।

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7,993 स्कूलों में शून्य नामांकन

रिपोर्ट के अनुसार, देश में 1,04,125 स्कूल एक ही शिक्षक के साथ चल रहे हैं। इनमें से लगभग 89 प्रतिशत स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। इसके अलावा, कुछ राज्यों में माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) काफी अधिक है। झारखंड में सरकारी माध्यमिक स्कूलों का पीटीआर 47:1 है। आदर्श विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात 10:1 और 18:1 के बीच माना जाता है। नामांकन की बात करें तो, देश में लगभग 7,993 ऐसे स्कूल हैं, जिनमें शून्य नामांकन है। पश्चिम बंगाल में ऐसे स्कूलों की संख्या सबसे अधिक (3,812) है, उसके बाद तेलंगाना (2,245) का स्थान आता है।

रिपोर्ट पर एक नजर

शिक्षकों की योग्यता : 02 फीसदी शिक्षक ही गणित में 70% अंगा पा सकते हैं, जबकि औसत अंक 46 फीसदी है।

गैर शैक्षणिक कार्य : औसतन 14% शिक्षण दिवस सर्वेक्षण, चुनाव और प्रशासनिक कार्यों जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में खर्च हो जाते हैं।

प्रयोशालाएं : सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में से केवल 51.7 प्रतिशत में ही विज्ञान प्रयोगशालाएं हैं।

पानी- बिजली: एक दशक में स्कूलों में बिजली की उपलब्धता 55% बढ़कर 91.9% हुई, लेकिन अब भी 1.19 लाख स्कूलों में बिजली नहीं है। करीब 14,505 स्कूलों में पानी, 59,829 स्कूलों में हाथ धोने की सुविधा नहीं है।

स्कूलों पर खर्च : रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत अपनी जीडीपी का 4.6 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करता है। ब्रिटेन-अमरीका लगभग 5.9%, जबकि जर्मनी-फ्रांस लगभग 5.4 प्रतिशत खर्च करते हैं।

यहां प्राथमिक शिक्षकों के सबसे ज्यादा पद खाली

बिहार: 2,08,784
झारखंड: 80,341
मध्यप्रदेश: 47,122

यहां ड्रॉप आउट औसत सबसे ज्यादा

पश्चिम बंगाल: 20%
अरुणाचल प्रदेश: 18.3%
कर्नाटक: 18.3%
असम: 17.5%

परख में राजस्थान , महाराष्ट्र बेहतर

परख (ज्ञान का मूल्यांकन, समीक्षा और विश्लेक्षण) आधारित परिणाम मानचित्रण के अनुसार झारखंड, गुजरात और जम्मू-कश्मीर का प्रदर्शन खराब रहा है। वहीं दूसरी ओर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र और राजस्थान का प्रदर्शन बेहतर रहा है। परख एनसीईआरटी की ओर से 2023 में बनाया गया राष्ट्रीय मूल्यांकन नियामक है।

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