Garba 2025: विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने नवरात्रि से संबंधित एक विवाद नियम जारी किया है। विहिप के मुताबिक महाराष्ट्र में होने वाले 'गरबा' कार्यक्रमों में केवल हिंदुओं को ही प्रवेश दिया जाना चाहिए।
VHP New Rule on Entry into Garba: नवरात्रि के ठीक पहले विश्व हिंदू परिषद (VHP) के विवादास्पद परामर्श ने महाराष्ट्र में सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। VHP ने गरबा आयोजकों को सलाह दी है कि कार्यक्रमों में केवल हिंदुओं को ही प्रवेश दिया जाए और इसके लिए प्रवेश द्वार पर आधार कार्ड की जांच अनिवार्य हो। साथ ही, प्रतिभागियों को तिलक लगाना और पूजा करना भी जरूरी बताया गया है। VHP का दावा है कि गरबा पूजा का रूप है, न कि मनोरंजन, इसलिए गैर-हिंदुओं को इसमें भाग लेने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।
इस सलाह पर भाजपा ने समर्थन जताया, जबकि कांग्रेस ने इसे समाज को बांटने की साजिश करार दिया। नवरात्रि 22 सितंबर से 1 अक्टूबर तक मनाई जाएगी और गरबा युवाओं व परिवारों का प्रमुख आकर्षण है।
VHP के महाराष्ट्र-गोवा प्रांत सचिव गोविंद शेंडे ने कहा, गरबा नृत्य नहीं, बल्कि देवी को प्रसन्न करने की पूजा है। परामर्श में आयोजकों को निर्देश दिया गया है कि प्रवेश पर आधार कार्ड चेक करें, तिलक लगाएं और प्रतिभागी पूजा कर लें। VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने कहा कि वे मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते। केवल आस्था वाले ही इसमें भाग लें। VHP और बजरंग दल के कार्यकर्ता राज्यभर में गरबा स्थलों पर नजर रखेंगे। नायर ने 'लव जिहाद' और गैर-हिंदुओं द्वारा उपद्रव की आशंका जताई, जो भिलवाड़ा व नागपुर जैसे इलाकों में पहले भी देखी गई। यह सलाह 2024-25 के नवरात्रि से पहले जारी की गई, जब गुजरात व मध्य प्रदेश में भी इसी तरह के नियम लागू हुए थे।
महाराष्ट्र के मंत्री व भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने VHP का साथ दिया। उन्होंने कहा कि आयोजकों को पुलिस अनुमति पर प्रवेश शर्तें तय करने का हक है। गरबा हिंदू आयोजन है। भाजपा मीडिया प्रमुख नवनाथ बान ने जोर दिया, अन्य धर्मों के लोग देवी पूजा में दखल न दें। देवी हमारी मां हैं। बान ने शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत की आलोचना पर पलटवार किया, जो इसे 'भेदभावपूर्ण' बता चुके हैं। भाजपा का रुख साफ है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का मामला है, न कि विभाजन का।
कांग्रेस विधायक दल नेता विजय वडेट्टीवार ने VHP पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि VHP समाज में आग लगाना चाहती है। धर्म के नाम पर बंटवारा कर राजनीतिक लाभ लेना उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। वडेट्टीवार ने इसे देश को अस्थिर करने की कोशिश बताया। महाराष्ट्र कांग्रेस ने इसे 'सांप्रदायिक उन्माद फैलाने वाला' करार दिया, जो नवरात्रि की भक्ति को कलंकित करेगा। विपक्ष का मानना है कि यह 'लव जिहाद' जैसे मुद्दों को भुनाने की रणनीति है।