
Pakistan Bayraktar TB2 Drones: पाकिस्तान एक तरफ जहां हथियारों की खरीद बढ़ा रहा वहीं, भारत के साथ लगती सीमा और नियंत्रण रेखा (LoC) के आसपास ड्रोन से निगरानी भी कर रहा है। दरअसल, खुफिया सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान के साथ लगती सीमा पर तुर्किये निर्मित बायरकतार TB2 ड्रोन की मौजूदगी देखी गई। खास बात यह है कि जब दोनों देशों के बीच सुरक्षा को लेकर तनाव बना हुआ है। दोनों देश सैन्य अभियानों में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता सिर्फ बायरकतार TB2 ड्रोन को लेकर नहीं है, बल्कि इसके जरिए सीमा के संवेदनशील इलाकों की गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई जा सकती है। खास बात यह है कि बायरकतार TB2 ड्रोन से केवल निगरानी ही नहीं बल्कि हथियार ले जाने में सक्षम है। ऐसे में निगरानी मिशन जरूरत पड़ने पर हमले की क्षमता से भी जुड़ सकता है।
तुर्किये द्वारा निर्मित एक मध्यम ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ान भरने वाला सशस्त्र ड्रोन है। यह ड्रोन खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी और सटीक हमले करने में माहिर है। यह ड्रोन हवा में लगातार 20 से 27 घंटे तक उड़ान भरने में सक्षम है। बायरकतार TB2 ड्रोन बेस स्टेशन से 300 किमी दूरी तक ऑपरेशन कर सकता है। इस ड्रोन की अधिकतम स्पीड करीब 130 किमी प्रति घंटा है।
बायरकतार TB2 ड्रोन 150 किलोग्राम तक वजन उठा सकता है, जिसमें लेजर-निर्देशित सटीक मिसाइलें शामिल हैं। खास बात यह है कि इस ड्रोन में हाई-डिफिनिशन डे-नाइट और इन्फ्रारेड कैमरे लगे हैं, जो रियल-टाइम थर्मल इमेज और वीडियो भेजते हैं। इस ड्रोन में स्वचालित उड़ान नियंत्रण और जीपीएस के बगैर भी नेविगेट करने की क्षमता है।
पाकिस्तान के ड्रोन अभियानों में मुरीद एयरबेस को महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। इसके अलावा रावलपिंडी के पास स्थित नूर खान एयरबेस और पाकिस्तान के दक्षिणी क्षेत्र में रहीम यार खान जैसे ठिकाने भी सैन्य अभियानों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।
भारत लगातार सीमा पर ड्रोन खतरे से निपटने के लिए निगरानी और काउंटर-ड्रोन व्यवस्था मजबूत कर रहा है। सरकार पहले ही बता चुकी है कि संवेदनशील इलाकों में एंटी-ड्रोन सिस्टम, इन्फ्रारेड सेंसर, CCTV या PTZ कैमरे और एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम लगाए गए हैं।
जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में हाल के महीनों में संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखे जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं। अगस्त 2026 में कठुआ के हीरानगर सेक्टर में संदिग्ध ड्रोन दिखाई देने के बाद सुरक्षा बलों ने तलाशी अभियान चलाया था। इस तरह पाकिस्तान की बढ़ती ड्रोन क्षमता और तुर्की के साथ उसका रक्षा सहयोग भारत के लिए सीमा सुरक्षा के मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण चुनौती बनता जा रहा है।