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पीओके में बवाल के बीच पाक गृहमंत्री का विवादित बयान, प्रदर्शनकारियों को बताया ‘कॉकरोच’

PoK Protests: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में जारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।
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Aug 02, 2026
POK Violence
पाक अधिकृत कश्मीर में हिंसा जारी, photo source@ANI

PoK Protests: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में जारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। वहीं, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने प्रदर्शनकारियों को भारत की तरह "दुश्मन" बताते हुए उनसे बातचीत से इनकार कर दिया है।

रिपोर्टों के अनुसार, पीओके में लोग रोज़गार, महंगाई, बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय चुनावों सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। इस सप्ताह हुई हिंसा में कम से कम 40 प्रदर्शनकारियों की मौत होने का दावा किया गया है।

प्रदर्शनकारियों को बताया 'कॉकरोच'

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा, "आप मानें या न मानें, जिस व्यवस्था के तहत हम जी रहे थे, वह ध्वस्त हो चुकी है।" इसके बाद उन्होंने 'जेनरेशन Z' का जिक्र करते हुए कहा, "अगर ये 'कॉकरोच' एकजुट हो जाएं, तो सब कुछ उलट-पुलट कर सकते हैं।" उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान की लगभग 60 प्रतिशत आबादी 30 वर्ष से कम उम्र की है। इसी संदर्भ में नकवी ने युवाओं का उल्लेख किया, हालांकि उनके बयान की व्यापक आलोचना हो रही है।

भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "रक्षा मंत्री द्वारा प्रदर्शनकारी नागरिकों को 'दुश्मन' करार देना पाकिस्तान का पीओके के निर्दोष लोगों के प्रति गहरे तिरस्कार को दर्शाता है।" उन्होंने कहा कि तथाकथित चुनाव पाकिस्तान की सत्ता प्रतिष्ठान द्वारा लोकतांत्रिक मूल्यों की "अपमानजनक अस्वीकृति" का उदाहरण हैं। जायसवाल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान की कार्रवाई की जांच करने और उसे कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील की।

हिंसा पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया सीमित

रिपोर्ट में कहा गया है कि पीओके में जारी हिंसा और विरोध प्रदर्शनों को अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षित ध्यान नहीं मिला है। कुछ विदेशी मीडिया संस्थानों ने इस घटनाक्रम को प्रमुखता से कवर किया, लेकिन व्यापक वैश्विक प्रतिक्रिया सीमित रही। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में अपने ही नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग की घटनाओं पर अपेक्षाकृत कम अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया देखने को मिली है। वहीं, यह सवाल भी उठ रहा है कि पाकिस्तान के भीतर आम लोग इन विरोध प्रदर्शनों और सरकारी कार्रवाई को किस नजरिए से देख रहे हैं।

Updated on:
02 Aug 2026 09:22 pm
Published on:
02 Aug 2026 09:21 pm